फार्मेसी डिप्लोमा प्रवेश में मनमानी फीस पर रोक, संस्थानों पर होगी सख्त कार्रवाई

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फार्मेसी डिप्लोमा प्रवेश में मनमानी फीस पर रोक, संस्थानों पर होगी सख्त कार्रवाई
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लखनऊ
 फार्मेसी डिप्लोमा में प्रवेश करने वाले अभ्यर्थियों के लिए अच्छी खबर है। निजी फार्मेसी संस्थान में आप निर्धारित फीस ही जमा करें।

संस्थान यदि अधिक फीस की मांग करता है तो आप संयुक्त प्रवेश परीक्षा परिषद से शिकायत कर सकते हैं। परिषद की ओर से ऐसी संस्थानों की मान्यता रद्द करने की चेतावनी दी गई है।

प्रदेश में इस वर्ष राजधानी समेत करीब 1,800 फार्मेसी संस्थानों में लगभग 1.20 लाख सीटों पर प्रवेश होंगे। इनमें जौनपुर, प्रयागराज और लखीमपुर खीरी के राजकीय फार्मेसी संस्थानों की फीस 12,000 रुपये वार्षिक निर्धारित की गई है। निजी संस्थानों की फीस 45 हजार रुपये निर्धारित है।

इसके बावजूद कई निजी संस्थानों में अभ्यर्थियों से 80 हजार से लेकर डेढ़ लाख रुपये तक की मनमानी वसूली की जाती है। आर्थिक रूप से कमजोर अभ्यर्थियों का प्रवेश नहीं हो पाता। अभ्यर्थियों को निर्धारित समय पर विकल्प भरने, दस्तावेजों का सत्यापन कराने और सीट आवंटन की प्रक्रिया पूरी करनी होगी।

काउंसिलिंग के पहले ही परिषद ने संस्थानों को चेतावनी देकर अभ्यर्थियों की चिंता को कम करने का प्रयास किया गया है। 24 जुलाई से 15 सितंबर तक फार्मेसी डिप्लोमा की काउंसिलिंग प्रक्रिया पूरी तरह आनलाइन होगी। अधिक जानकारी के लिए अभ्यर्थी परिषद की वेबसाइट jeecup.admissions.nic.in देख सकते हैं।

इंजीनियरिंग ट्रेड की काउंसिलिंग पूरी होने के बाद 24 जुलाई से फार्मेसी की काउंसिलिंग शुरू होगी। निजी संस्थानों के लिए 45 हजार रुपये और राजकीय संस्थानों के लिए 12 हजार रुपये फीस निर्धारित है। यदि कोई संस्थान निर्धारित शुल्क से अधिक वसूली करता है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। जरूरत पड़ने पर संस्थान की मान्यता भी रद्द होगी। अधिक वसूली पर अभ्यर्थी संबंधित जिले के जिलाधिकारी और परिषद को शिकायत जरूर करें।
    – संजीव कुमार सिंह, सचिव, संयुक्त प्रवेश परीक्षा परिषद

 

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