रणथंभौर टाइगर रिजर्व में फर्जी टिकट मामला, दो गाइड बैन लेकिन गार्ड को मिली राहत पर सवाल

Editor
3 Min Read
रणथंभौर टाइगर रिजर्व में फर्जी टिकट मामला, दो गाइड बैन लेकिन गार्ड को मिली राहत पर सवाल
WhatsApp Share on WhatsApp
add_action('wp_footer', 'jazzbaat_new_version_modal'); function jazzbaat_new_version_modal() { ?>
SW24news • Beta

 सवाई माधोपुर

 विश्व प्रसिद्ध रणथंभौर टाइगर रिजर्व (Ranthambore Tiger Reserve) में फर्जी टिकट के जरिए टाइगर सफारी कराने के गंभीर मामले में वन प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है. डीएफओ मानस सिंह ने जांच रिपोर्ट के आधार पर दोषी पाए गए दो नेचर गाइडों के पार्क में प्रवेश पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है. हालांकि, इस पूरी कार्रवाई में वन विभाग के ही एक कर्मचारी को मिली 'राहत' ने विभाग की निष्पक्षता पर सवालिया निशान लगा दिए हैं.

30 मार्च को हुआ था फर्जीवाड़े का भंडाफोड़
यह पूरा मामला 30 मार्च 2026 की सुबह की पारी का है. जोन नंबर 1 में गश्ती दल ने जब कैंटर नंबर RJ-25-TA-1862 की जांच की, तो उसमें दो पर्यटक बिना किसी वैध टिकट के सफारी करते पाए गए. डीएफओ मानस सिंह के निर्देश पर एसीएफ महेश शर्मा ने जब मौके पर जांच की, तो पर्यटकों ने खुलासा किया कि उन्होंने एक एजेंट को 8000 रुपये देकर सफारी बुक की थी और उसकी रसीद भी पेश की. जांच में सामने आया कि इन पर्यटकों को फर्जी तरीके से पार्क में प्रवेश कराया गया था.

गाइडों पर एक्शन, गार्ड पर मेहरबानी?
सहायक वन संरक्षक (ACF) निखिल शर्मा की जांच रिपोर्ट में नेचर गाइड हरविंदर सिंह और जगदीश को वाइल्डलाइफ नियमों की अनदेखी और फर्जीवाड़े का दोषी माना गया. इसके आधार पर डीएफओ ने दोनों पर पार्क में प्रवेश का प्रतिबंध लगा दिया. लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि इसी जांच में दोषी पाए गए फॉरेस्ट गार्ड भीम सिंह चौधरी को महज 17 सीसी (17CC) की चार्जशीट देकर छोड़ दिया गया. इतना ही नहीं, दोषी गार्ड को रणथंभौर के महत्वपूर्ण 'जोगी महल' प्रवेश द्वार पर तैनात कर अतिरिक्त चार्ज भी सौंप दिया गया है.

विभाग की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवाल
फर्जी टिकट जैसे गंभीर भ्रष्टाचार के मामले में नेचर गाइडों पर तो सख्त गाज गिरी है, लेकिन विभाग के अपने कर्मचारी पर दिखाई गई इस 'मेहरबानी' से अधिकारियों की मंशा पर सवाल उठ रहे हैं. सवाल यह है कि जब जांच में गार्ड द्वारा 'सिंह द्वार' से पर्यटकों को अवैध रूप से बैठाने की बात साबित हो चुकी है, तो उसे दंडित करने के बजाय इनाम के तौर पर महत्वपूर्ण जिम्मेदारी क्यों दी गई?

Share This Article
Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *