राजस्थान UCC पर मंथन, सभी धर्मों के प्रतिनिधियों ने रखे अपने सुझाव

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राजस्थान UCC पर मंथन, सभी धर्मों के प्रतिनिधियों ने रखे अपने सुझाव
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जयपुर
राजस्थान समान नागरिक संहिता 2026 (Uniform Civil Code- UCC) को लेकर शुक्रवार को जयपुर जिला कलेक्ट्रेट में बैठक हुई. आज सुबह 10 से 12:30 सभी धर्मों के प्रतिनिधि, शिक्षाविद, अधिवक्ता, सामाजिक संगठनों के सदस्य और अन्य वर्गों के लोग शामिल हुए. आज बैठक में कई मुद्दों पर बातचीत हुई, जिसमें हवामहल विधायक बाबा बालमुकुंद आचार्य भी शामिल हुए. उन्होंने कहा कि सभी पक्षों को अपनी बात रखने का अवसर दिया गया है. प्रदेश में समान कानून की मांग बढ़ रही है. उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि वह देशहित के मुद्दों का विरोध करती है. बालमुकुंदाचार्य ने कहा कि बैठक में सभी धर्मगुरुओं और जनप्रतिनिधियों ने अपनी बात रखी. मुस्लिम पक्ष के लोगों ने भी अपनी बात रखी, जिसे सुनकर मैं हैरान हूं.

'कोई चार पत्नी रखेगा, समर्थन नहीं होगा'
भाजपा विधायक ने कहा कि क्या कुछ लोग शरिया कानून लागू करना चाहते हैं, उन्होंने कहा कि जब देश और दुनिया आगे बढ़ रहे हैं, तब ये चाहते हैं कि कोई चार पत्नी रखेगा. एक पत्नी से कई कई बच्चे पैदा करेंगे, इस तरह की बात का कोई समर्थन नहीं होगा. हवामहल विधायक ने आगे कहा कि मैं प्रधानमंत्री मोदी का धन्यवाद देना चाहता हूं कि उन्होंने तीन तलाक का कानून बनाया. इससे माता और बहनों का संरक्षण हो रहा है जो आज भी पीड़ित हैं.

पूरे देश में सामान कानून हो, समान सिविल कानून बने, जहां जिस प्रदेश में जैसी आवश्यकता हो वैसा कानून बने, किसी धर्म संस्कृति के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं हो रहा है. सब लोग समान रूप से आगे बढ़ पाए, ये हमारा मानना है.

'मौलवियों को कई बेगम रखने का अवसर नहीं मिलेगा'
उन्होंने कहा कि हिन्दू समाज में मृत्यु भोज सबसे बड़ा रीति रिवाज था. उसके लिए कानून बना, उसे कुरीति माना गया. हमनें इसको माना, कानून की पालना की, आज मृत्यु भोज बंद किया गया है. जहां हो रहा है वहां कार्रवाई भी होती है. विवाहों में व्यर्थ के खर्चे होना, दान दहेज देना बंद होना चाहिए. ये समय की आवश्यकता है, परिवर्तन की आवश्यकता है. कुछ लोग चाहते हैं, शरिया कानून बन जाए, मौलानाओं और मौलवियों को कई कई बेगम रखने का, हलाला जैसे कुकृत्य करने का अवसर मिले तो यह गलत है, ऐसा नहीं होगा.

लिव-इन रिलेशनशिप की वैधता पर भी चर्चा
समिति के अध्यक्ष शत्रुघ्न सिंह ने बताया कि आज की बैठक के दौरान सभी पक्षों से सुझाव लिए गए हैं. सबसे बड़ी बात यह सामने आई, जिसमें मुस्लिम और हिंदू पक्ष दोनों ने यह बात रखी कि लिविंग रिलेशनशिप को वैध नहीं करना चाहिए. साथ ही यह बात भी सामने आई कि लव मैरिज माता-पिता की अनुमति से होनी चाहिए. हमने सभी लोगों की बात सुनी है. आमजन की राय भी लेंगे. उन्होंने कहा कि लगभग सभी लोग यूसीसी को लागू करने के पक्ष में हैं. कुछ बातों पर संशय सामने आया. मुस्लिम पक्ष की ओर से यह उनके फैमिली लॉज और पर्सनल लॉ लेकर के बातचीत सामने आई है. उन्होंने कहा कि सभी की बात सुनकर राज्य सरकार को भेजा जाएगा.

UCC पर आम नागरिकों से पूछे जा रहे 19 सवाल
    क्या वे संविधान के अनुच्छेद-44 में समान नागरिक संहिता के प्रावधान से परिचित हैं?
    क्या वे राजस्थान में यूसीसी लागू करने के पक्ष में हैं?
    क्या यूसीसी संविधान के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन किए बिना लागू की जा सकती है?
    क्या विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, वसीयत और लिव-इन संबंधों को यूसीसी में शामिल किया जाए?
    धर्म आधारित पारिवारिक कानूनों के कई प्रावधानों में पुरुषों एवं महिलाओं के अधिकारों के साथ अलग-अलग व्यवहार होता है। क्या आप सहमत हैं कि इस प्रकार के भेदभावपूर्ण व्यवहार को समाप्त किया जाना चाहिए?
    क्या विवाह विच्छेद / तलाक का अनिवार्य पंजीकरण होना चाहिए?
    क्या सभी समुदायों पर समान रूप से लागू होने वाले विवाह विच्छेद /तलाक के एक जैसे आधार (Common Grounds for Divorce) होने चाहिए?
    क्या विवाह विच्छेद / तलाक की स्थिति में भरण-पोषण (Maintenance) के लिए एक समान विधि होनी चाहिए?
    क्या समान सिविल संहिता (UCC) के प्रभावी होने से पारिवारिक विवादों में कमी आएगी तथा विधिक प्रक्रियाएं अधिक प्रभावी एवं सरल बनेंगी?
    क्या समान सिविल संहिता (UCC) के अन्तर्गत सभी समुदायों में पुरुषों एवं महिलाओं के लिए समान सम्पत्ति अधिकार सुनिश्चित होना चाहिए?
    क्या समान सिविल संहिता (UCC) में सहमति से लिव-इन संबंधों में रहने वाली महिलाओं एवं पुरुषों के अनिवार्य पंजीकरण का प्रावधान होना चाहिए?
    क्या समान सिविल संहिता (UCC) में लिव-इन संबंधों में रहने वाली महिलाओं एवं पुरुषों के रजिस्ट्रेशन से इनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकेगी?
    क्या लिव-इन संबंधों की समाप्ति पर विवाह विच्छेद के फलस्वरूप जो अधिकार निर्मित होते हैं, वैसे ही अधिकार निर्मित होने चाहिए?
    क्या समान सिविल संहिता (UCC) के अन्तर्गत लिव-इन संबंधों में रहने वाली महिलाओं एवं उनसे जनित संतानों के भरण-पोषण के प्रावधानों को सम्मिलित किया जाए?
    क्या लिव-इन में रहने वालों के लिए उत्तराधिकार संबंधी प्रावधानों को सम्मिलित किया जाए?
    क्या बहुविवाह प्रथा से महिला के अधिकार सुरक्षित नहीं रहते हैं?
    क्या समान सिविल संहिता से समाज में प्रचलित रूढ़िवादी सामाजिक कुप्रथाओं को समाप्त किया जा सकेगा?
    क्या स्वःअर्जित सम्पत्ति का वसीयत द्वारा निस्तारण करने हेतु एक जैसे प्रावधान होने चाहिए?
    क्या उत्तराधिकार से सम्पत्ति के निस्तारण के समान प्रावधान होने चाहिए?

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