हरियाणा में निवेश को बढ़ावा: Haryana Government ने लाया ओम्निबस बिल, जटिल कानूनों से मिलेगी राहत

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चंडीगढ़.

हरियाणा सरकार ने निवेश के मामले में प्रदेश को अग्रणी गंतव्य बनाने के मकसद से प्रशासनिक सुधारों की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए विनियमन में ढील (डी-रेगुलेशन) देने का अभियान शुरू किया है। इसी कड़ी में प्रस्तावित सर्वग्राही विधेयक (ओम्निबस बिल) के माध्यम से राज्य सरकार द्वारा सुधारों को संस्थागत रूप देने की तैयारी है।

कैबिनेट सचिवालय के विशेष सचिव श्री के.के. पाठक और हरियाणा के मुख्य सचिव श्री अनुराग रस्तोगी की अध्यक्षता में यहां हुई एक उच्च स्तरीय बैठक में अनुपालन में कमी और डी-रेगुलेशन फेज-2 के अन्तर्गत हुए सुधारों की समीक्षा की गई। ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ के लिए प्रस्तावित हरियाणा ओम्निबस बिल विभिन्न नियामकीय बदलावों को एकीकृत विधायी ढांचे में समाहित करेगा। इससे विभागों में एकरूपता सुनिश्चित होगी और लालफीताशाही को कम करने तथा शासन को सरल बनाने वाले सुधारों को दीर्घकालिक कानूनी आधार मिलेगा।

वरिष्ठ प्रशासनिक सचिवों ने प्रगति की समीक्षा की
बैठक में वरिष्ठ प्रशासनिक सचिवों और विभागाध्यक्षों ने 28 प्राथमिकता वाले सुधार क्षेत्रों में हुई प्रगति की समीक्षा की। इन सुधारों का उद्देश्य अनुपालन बोझ को कम करना, स्वीकृति प्रक्रियाओं में तेजी लाना तथा व्यवसायों, संस्थानों और नागरिकों के लिए एक सुगम पारिस्थितिकी तंत्र तैयार करना है। अधिकांश सुधार प्रस्ताव प्रस्तुत किए जा चुके हैं और कई लागू होने की प्रक्रिया में हैं, जो राज्य के सुधार एजेंडे में तेजी को दर्शाता है। मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने सभी विभागों को लंबित प्रस्तावों को शीघ्र पूरा करने, एमआईएस पोर्टल पर कार्ययोजनाएं तुरंत अपलोड करने और यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए कि सुधारों का जमीनी स्तर पर स्पष्ट और मापनीय प्रभाव दिखाई दे। उन्होंने कहा कि इन सुधारों की सफलता जमीनी स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन और विभागों के बीच बेहतर समन्वय पर निर्भर करेगी।
सुधारों के प्रमुख क्षेत्रों में भूमि और निर्माण नियमों का सरलीकरण शामिल है। अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश के लगभग 70 प्रतिशत क्षेत्र में ‘चेंज ऑफ लैंड यूज’ (सीएलयू) की आवश्यकता नहीं है, जिससे निवेशकों और भूमि मालिकों को बड़ी राहत मिली है।

सीएलयू स्वीकृतियों को स्वचालित बनाने की दिशा में कार्य
शेष नियंत्रित क्षेत्रों में भी सीएलयू स्वीकृतियों को स्वचालित बनाने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। यह प्रणाली औद्योगिक क्षेत्रों में पहले से लागू है और मार्च 2027 तक इसका अन्य श्रेणियों में भी विस्तार करने की योजना है। मांग आधारित भूमि उपयोग प्रणाली में गतिविधियों की अनुमति होगी जब तक कि वे विशेष रूप से प्रतिबंधित न हों। इससे नियामकीय बाधाओं में और कमी आएगी। निर्माण क्षेत्र में कब्जा प्रमाण पत्र के लिए आवश्यक अनुमोदनों को सरल बनाने की दिशा में कार्य किया जा रहा है।

कई अनावश्यक एनओसी को हटाने का प्रस्ताव है, जिससे समय और लागत में उल्लेखनीय कमी आएगी। हरियाणा उद्यम प्रोत्साहन केन्द्र को एक सशक्त सिंगल-विंडो प्लेटफॉर्म के रूप में विकसित किया जा रहा है। इससे सभी व्यावसायिक स्वीकृतियों के लिए एकीकृत प्रणाली उपलब्ध होगी। यह प्लेटफॉर्म विभिन्न विभागों के बीच समन्वय स्थापित कर तेज निर्णय प्रक्रिया सुनिश्चित करेगा। लगभग 30 दिनों में स्वीकृति देने के लक्ष्य के साथ ‘सर्विस लेवल एग्रीमेंट’ लागू किए जा रहे हैं। साथ ही, पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के लिए डिजिटल डैशबोर्ड भी विकसित किया जा रहा है, जिससे स्वीकृति की समय-सीमा की निगरानी की जा सकेगी।

राज्य सरकार के इस सुधार एजेंडे में क्या?
सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) राज्य सरकार के इस सुधार एजेंडे के केंद्र में हैं। नए सुधारों के तहत औद्योगिक प्लॉट के उप-विभाजन, पूर्व स्वीकृति के बिना व्यवसायिक गतिविधियों में बदलाव, संपत्तियों के हस्तांतरण या सब-लीज की प्रक्रिया को सरल बनाया जा रहा है। प्रस्तावित ‘हरियाणा राइट टू बिजनेस एक्ट’ के तहत उद्यमों को स्व-घोषणा के आधार पर कार्य शुरू करने की अनुमति होगी और शुरुआती चरण में निरीक्षणों में भी कमी की जाएगी।

इंफ्रास्ट्रक्चर को सुदृढ़ करने के लिए 500 करोड़ रुपये का ‘सक्षम’ फंड प्रस्तावित है, जिससे पुराने औद्योगिक क्षेत्रों का उन्नयन किया जाएगा। इसके अलावा, अपशिष्ट उपचार और अग्नि सुरक्षा जैसी साझा सुविधाओं के लिए सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल पर भी कार्य किया जा रहा है। हरियाणा अब पारंपरिक और जटिल प्रावधानों के स्थान पर वैश्विक मानकों के अनुरूप जोखिम-आधारित आधुनिक अग्नि सुरक्षा नियम लागू करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। औद्योगिक क्षेत्रों में साझा अग्नि सुरक्षा ढांचा विकसित करने से लागत कम होगी और सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी।

अनावश्यक लाइसेंस समाप्त करने में भी उल्लेखनीय प्रगति
राज्य ने अनावश्यक लाइसेंस समाप्त करने में भी उल्लेखनीय प्रगति की है। नगर निगम कानूनों से ट्रेड लाइसेंस पहले ही हटाए जा चुके हैं और प्रस्तावित ओम्निबस बिल के तहत अन्य लाइसेंसों को भी सरल बनाने की योजना है, जिससे विनियामक ढांचे में दोहराव खत्म होगा। बैठक में लोक निर्माण (भवन एवं सड़कें) विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव ए.के. सिंह, उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के आयुक्त एवं सचिव डाॅ. अमित कुमार अग्रवाल, अग्निशमन सेवाएं विभाग के महानिदेशक शेखर विद्यार्थी, हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष जे. गणेशन तथा उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के महानिदेशक यश गर्ग सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

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