भारत पर लगाए आरोप निकले बेबुनियाद! कनाडा पुलिस की जांच ने खोली पूर्व PM ट्रूडो के दावों की पोल

Editor
8 Min Read
भारत पर लगाए आरोप निकले बेबुनियाद! कनाडा पुलिस की जांच ने खोली पूर्व PM ट्रूडो के दावों की पोल
WhatsApp Share on WhatsApp
add_action('wp_footer', 'jazzbaat_new_version_modal'); function jazzbaat_new_version_modal() { ?>
SW24news • Beta

 नई दिल्ली

लगभग तीन साल पहले कनाडा के तत्कालीन प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या में भारतीय एजेंटों की संलिप्तता का आरोप लगाया था. लेकिन अब कनाडा की पुलिस का कहना है कि हमारी जांच में निज्जर की हत्या में भारत सरकार के अधिकारियों की संलिप्तता के कोई सबूत नहीं मिले हैं। 

यह बयान ऐसे समय में सामने आया है, जब अमेरिका ने निज्जर हत्याकांड में भारतीय मूल के गैंगस्टर्स के खिलाफ आरोप तय किए हैं. कनाडाई पुलिस का यह बयान ट्रूडो सरकार के उस पुराने रुख से बिल्कुल अलग है, जिसने भारत और कनाडा के बीच दशकों का सबसे गंभीर कूटनीतिक संकट खड़ा कर दिया था। 

ट्रूडो के आरोपों को भारत ने शुरू से ही बेतुका और राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया था. इन आरोपों के बाद दोनों देशों ने एक-दूसरे के राजनयिकों को निष्कासित कर दिया था, द्विपक्षीय वार्ताएं ठप हो गई थीं और रिश्तों में गहरी तल्खी आ गई थी। 

रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस (RCMP) का यह खुलासा अमेरिकी अधिकारियों द्वारा एक आरोपपत्र सार्वजनिक किए जाने के कुछ घंटों बाद आया है. इस आरोपपत्र में जेल में बंद गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई और उसके सहयोगी गोल्डी बरार पर 2023 में कनाडा में हरदीप सिंह निज्जर की हत्या का निर्देश देने का आरोप लगाया गया है. हालांकि, रिपोर्ट के अनुसार अमेरिकी आरोपपत्र में भी भारतीय सरकार की किसी भूमिका का आरोप नहीं लगाया गया है। 

बता दें कि कनाडाई नागरिक हरदीप सिंह निज्जर को भारत ने 2020 में आतंकवादी घोषित किया था. वह प्रतिबंधित संगठन खालिस्तान टाइगर फोर्स (KTF) का प्रमुख था. जून 2023 में कनाडा के ब्रिटिश कोलंबिया प्रांत के सर्रे शहर में एक गुरुद्वारे की पार्किंग में दो नकाबपोश हमलावरों ने उसकी गोली मारकर हत्या कर दी थी। 

जस्टिन ट्रूडो के पद छोड़ने और मार्क कार्नी के प्रधानमंत्री बनने के बाद भारत और कनाडा ने वर्षों की कड़वाहट के बाद अपने संबंधों को फिर से सामान्य बनाने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं. दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय संपर्क और राजनयिक संवाद दोबारा शुरू हुए। 

RCMP की डिप्टी कमिश्नर लिसा मोरलैंड ने स्पष्ट किया कि इस मामले में जांच अभी भी जारी है. उन्होंने कहा कि संगठित अपराध सिंडिकेट की इस जांच और अब तक लगाए गए आरोपों के आधार पर ऐसा कोई सबूत नहीं है, जिससे यह कहा जा सके कि भारतीय सरकार के अधिकारी इस मामले में शामिल थे या उनके खिलाफ आरोप लगाए जाएंगे. अब तक ऐसी कोई जानकारी सामने नहीं आई है जो भारतीय सरकार को इस मामले से जोड़ती हो। 

उन्होंने कहा कि गिरफ्तारियों और जब्ती की कार्रवाई के आधार पर जांच आगे बढ़ रही है. मोरलैंड ने कहा कि भारतीय सरकार इस जांच में सहयोग कर रही थी. RCMP का यह बयान इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि यह सितंबर 2023 में कनाडाई संसद में ट्रूडो द्वारा किए गए दावों से अलग है. उस समय ट्रूडो ने कहा था कि कनाडाई सुरक्षा एजेंसियां निज्जर की हत्या और भारतीय एजेंटों के बीच संभावित संबंध के विश्वसनीय आरोपों की जांच कर रही हैं। 

भारत ने लगातार इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा था कि कनाडा ने अपने दावों के समर्थन में कोई ठोस या विश्वसनीय सबूत साझा नहीं किया. वहीं, कनाडा पुलिस का यह बयान ऐसे समय में सामने आया है, जब अमेरिकी न्याय विभाग ने ऑपरेशन हार्ड बॉल के तहत कई आरोपपत्र सार्वजनिक किए हैं। 

आरोपपत्र में बिश्नोई को निज्जर की हत्या के लिए जिम्मेदार बताया गया है. बिश्नोई अगस्त 2023 से गुजरात की साबरमती सेंट्रल जेल में बंद है. न्याय विभाग के अनुसार, ऑपरेशन हार्ड बॉल का उद्देश्य ऐसे भारतीय संगठित अपराध सिंडिकेटों पर कार्रवाई करना था जो अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के पार रंगदारी, टारगेटेड किलिंग, गोलीबारी, बड़े पैमाने पर नशीले पदार्थों की तस्करी और अन्य गंभीर अपराधों में शामिल रहे हैं। 

ट्रूडो के जाने के बाद पटरी पर लौट रहे भारत-कनाडा संबंध?
लॉरेंस बिश्नोई के खिलाफ आरोपपत्र इस पूरे मामले को संगठित अपराध के दायरे में रखता है, जबकि RCMP का ताजा बयान भारतीय सरकार की संलिप्तता वाले पुराने राजनीतिक दावे को कमजोर करता है। 

यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है, जब ओटावा और नई दिल्ली ट्रूडो काल के कूटनीतिक गतिरोध से आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे हैं. मार्क कार्नी के प्रधानमंत्री बनने के बाद दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय संपर्क फिर से शुरू हुए हैं और संबंधों में धीरे-धीरे सुधार देखने को मिला है। 

मई 2026 के पहले सप्ताह में कनाडाई सुरक्षा खुफिया सेवा (CSIS) की 2025 की रिपोर्ट में खालिस्तानी उग्रवादियों को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बताया गया था. रिपोर्ट में कहा गया कि एक छोटा लेकिन सक्रिय नेटवर्क कनाडा की जमीन का इस्तेमाल हिंसक गतिविधियों के लिए धन जुटाने और समर्थन देने के आधार के रूप में कर रहा है. इसमें फंडिंग, प्रभाव नेटवर्क और भारत से जुड़े उग्रवादी संगठनों के साथ संबंधों पर चिंता जताई गई थी। 

कनाडा के रुख में बड़ा बदलाव
कनाडा के शीर्ष पुलिस अधिकारी की यह टिप्पणी देश के रुख में एक बड़ा बदलाव दिखाती है, जो कनाडा के पूर्व प्रधनमंत्री जस्टिन ट्रूडो के कार्यकाल में लगाए गए आरोपों के उलट है। साल 2023 में तत्कालीन प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने कहा था कि उनके पास खालिस्तानी चरमपंथी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या में भारतीय एजेंटों के संबंधों के विश्वसनीय सबूत हैं।

ट्रूडो के दौर में बिगड़े रिश्ते
भारत में आतंकवादियों की लिस्ट में शामिल कनाडाई नागरिक निज्जर की जून 2023 में ब्रिटिश कोलंबिया के सरे में एक गुरुद्वारे के बाहर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। भारत ने हत्या में शामिल होने के ट्रूडो के आरोपों को खारिज कर दिया और इसे मनगढ़ंत और बेबुनियाद कहा था। भारत ने कनाडा से इस बारे में सबूत की भी मांग की थी, जिसे कभी उपलब्ध नहीं कराया गया। ट्रूडो के कार्यकाल में इस मामले ने कूटनीतिक विवाद का रूप लिया और दोनों देशों ने अपने उच्चायुक्तों को वापस बुला लिया। 

मार्क कार्नी ने की नई शुरुआत
हालांकि, ट्रूडो के उत्तराधिकारी मार्क कार्नी के नेतृत्व में दोनों देशों के रिश्तों ने गति पकड़ी, जब ओटावा ने इसे सुधारने की पहल की। उच्चायुक्तों को उनके पदों पर बहाल किया गया। वीजा सेवाएं शुरू की गईं। इसी साल फरवरी के आखिर में कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने भारत का दौरा किया। इस दौरान दोनों देशों ने एक नई रणनीतिक साझेदारी की घोषणा की।

 

Share This Article
Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *