भोपाल में रिश्तों की मिसाल! बेटे के निधन के बाद सास-ससुर ने विधवा बहू का कराया पुनर्विवाह, पिता बनकर किया कन्यादान

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भोपाल में रिश्तों की मिसाल! बेटे के निधन के बाद सास-ससुर ने विधवा बहू का कराया पुनर्विवाह, पिता बनकर किया कन्यादान
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 भोपाल
 मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से रिश्तों को नई परिभाषा देने वाली एक भावुक और प्रेरणादायक कहानी सामने आई है। बेटे के असमय निधन के बाद एक परिवार ने अपनी विधवा बहू को बेटी का दर्जा देते हुए उसका पुनर्विवाह कराया। इतना ही नहीं, ससुर ने स्वयं पिता की भूमिका निभाते हुए कन्यादान किया और पूरे सम्मान के साथ उसे नए जीवन की ओर विदा किया। इस भावुक पल ने विवाह समारोह में मौजूद हर शख्स की आंखें नम कर दीं।

बहू का भविष्य संवारने का लिया संकल्प
यह मार्मिक घटना  रात संत हिरदाराम नगर के समीप ग्राम भौंरी स्थित एक विवाह समारोह में देखने को मिली। सभी वैवाहिक रस्में पारंपरिक रीति-रिवाजों से संपन्न हुईं। सबसे भावुक क्षण तब आया, जब किसान दिनेश बैरागी ने अपनी बहू प्रियंका का कन्यादान कर उसे बेटी की तरह आशीर्वाद देते हुए नए जीवन की शुभकामनाएं दीं।

परिवार के अनुसार, वर्ष 2018 में दिनेश बैरागी के पुत्र कपिल का विवाह कुलूखेड़ी गांव निवासी प्रियंका से हुआ था। उस समय प्रियंका की पढ़ाई चल रही थी, इसलिए उसकी विदाई नहीं हुई। वर्ष 2023 में वह ससुराल आई और अपने व्यवहार से पूरे परिवार का दिल जीत लिया।

कैंसर से बेटे की मौत के बाद लिया बड़ा फैसला
इसी बीच कपिल को कैंसर होने का पता चला। लंबे समय तक इलाज चला, लेकिन वर्ष 2024 में उनका निधन हो गया। बेटे को खोने के गहरे दुख के बावजूद परिवार ने प्रियंका का भविष्य संवारने का निर्णय लिया। सोमवार को प्रियंका का विवाह विदिशा जिले के ग्राम अरारी खेजड़ा निवासी गोबिंद बैरागी के साथ संपन्न कराया गया। विवाह की सभी तैयारियों से लेकर हर रस्म तक का दायित्व दिनेश बैरागी और उनके परिवार ने निभाया।

'बहू नहीं, बेटी का कन्यादान किया'
विवाह के बाद दिनेश बैरागी ने कहा कि उन्होंने हमेशा प्रियंका को बहू नहीं, बेटी माना और उसका कन्यादान करना उनके लिए सौभाग्य की बात है। उनका मानना है कि जीवन कठिन परिस्थितियों में भी आगे बढ़ना चाहिए और परिवार का दायित्व है कि वह अपने सदस्यों का साथ निभाए।

वहीं, प्रियंका के पिता रामबाबू बैरागी भी इस अवसर पर भावुक हो गए। उन्होंने कहा कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि बेटी के ससुराल वाले ही उसके पुनर्विवाह की पूरी जिम्मेदारी उठाकर समाज के सामने इतनी बड़ी मिसाल पेश करेंगे।

 

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