मथुरा श्रीकृष्ण जन्मभूमि के लिए अयोध्या जैसी कार सेवा का ऐलान, जानें कब और कैसे होगा आयोजन

Editor
3 Min Read
मथुरा श्रीकृष्ण जन्मभूमि के लिए अयोध्या जैसी कार सेवा का ऐलान, जानें कब और कैसे होगा आयोजन
WhatsApp Share on WhatsApp
add_action('wp_footer', 'jazzbaat_new_version_modal'); function jazzbaat_new_version_modal() { ?>
SW24news • Beta

मथुरा 
राम मंदिर में दान चोरी का मामला जहां गर्माया हुआ है, वहीं मथुरा से एक नया विवाद उभरने की आहट दिख रही है. मामला श्रीकृष्ण जन्मभूमि से जुड़ा हुआ है. अयोध्‍या की तरह ही यहां भी विवादित ढांचे/गुबंद को तोड़ने की तैयारी की जा रही है. इसके लिए बाकायदा बैठक, मुलाकातें भी हो रही हैं. चित्रगुप्त पीठाधीश्वर स्वामी सच्चिदानंद महाराज ने अंतर्राष्ट्रीय कथा वाचक ठाकुर देवकीनंदन से जन्मभूमि आंदोलन को लेकर मुलाकात की है. सच्चिदानंद महाराज ने श्रीकृष्‍ण जन्मभूमि मुक्ति के लिए विवादित गुंबद तोड़ने की घोषणा की है और देवकीनंदन ठाकुर ने उन्‍हें अपना समर्थन भी दे दिया है. ऐसे में दिन और तारीख भी तय कर दी है, ताकि वहां कूच की जा सके। 

मथुरा श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति के लिए कार सेवा का ऐलान
दरअसल, मथुरा श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति के लिए चित्र गुप्त पीठाधीश्वर सच्चिदानंद महाराज ने अंतर्राष्ट्रीय कथा वाचक ठाकुर देवकीनंदन महाराज से मुलाक़ात की और 9 अगस्त क्रांति दिवस के दिन विवादित गुंबद तोड़ने के लिए समर्थन मांगा. इस पर ठाकुर देवकीनंदन महाराज ने कार सेवा के लिए समर्थन दिया। 

स्वामी सच्चिदानंद महाराज ने बताया कि श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति के लिए 9 अगस्त को एक और कार सेवा की जाएगी. इस कार सेवा के लिए ब्रजवासी, साधु संत और धर्म गुरुओं से सम्पर्क कर कार सेवा में शामिल होने की अपील की जा रही है. कार सेवा के लिए अंतर्राष्ट्रीय कथा वाचक ठाकुर देवकीनंदन महाराज ने भी अपना समर्थन दिया है। 

शाही ईदगाह मस्जिद कमेटी क्‍या बोली?
स्वामी सच्चिदानंद महाराज की इस घोषणा के बाद शाही ईदगाह मस्जिद कमेटी की तरफ से भी बयान आया है. कमेटी के सचिव एवं पक्षकार तनवीर अहमद ने कहा कि जहां मामले न्यायालय में लंबित हों, वहां इस तरह की बयानबाजी ठीक नहीं है. न्यायालय पर ही सबको भरोसा है. संविधान पर सबको भरोसा है. राम मंदिर का मामला अलग है. वहां तो रामलला तिरपाल में बैठे थे. यहां तो मंदिर अलग है, मस्जिद अलग है. दोनों के रास्ते भी अलग हैं. मस्जिद में पांच टाइम की नमाज होती है और वहां भजन-पूजन. ये दोनों आपसी भाईचारे के प्रतीक हैं। 

TAGGED: ,
Share This Article
Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *