यूपी में ऑर्गेनिक खेती से बदलेगी किसानों की तस्वीर, युवाओं के लिए खुलेंगे एग्री-बिजनेस के नए रास्ते

Editor
10 Min Read
यूपी में ऑर्गेनिक खेती से बदलेगी किसानों की तस्वीर, युवाओं के लिए खुलेंगे एग्री-बिजनेस के नए रास्ते
WhatsApp Share on WhatsApp
add_action('wp_footer', 'jazzbaat_new_version_modal'); function jazzbaat_new_version_modal() { ?>
SW24news • Beta

लखनऊ
आज का यूथ खेती को पहले जैसी नज़र से नहीं देख रहा है। वह खेत को केवल हल, बीज और फसल तक सीमित नहीं मानता, बल्कि खेती में ब्रांड, पैकेजिंग, ऑनलाइन सेल, फार्म विजिट, प्रोसेसिंग और हेल्दी फूड मार्केट भी देख रहा है। यही सोच यूपी में ऑर्गेनिक खेती को नया मौका दे सकती है

ऑर्गेनिक खेती का मतलब ऐसी खेती से है, जिसमें मिट्टी, पानी, बीज, खाद और फसल की सेफ्टी पर ज्यादा ध्यान दिया जाए। इसमें केमिकल पर निर्भरता कम करने, जैविक खाद, कंपोस्ट, वर्मी-कंपोस्ट, गोबर, गोमूत्र आधारित इनपुट, फसल चक्र और नेचुरल तरीके अपनाने पर जोर रहता है।

यूपी जैसे बड़े कृषि राज्य में यह बदलाव केवल खेती का तरीका नहीं बदलता, बल्कि यूथ के लिए नया एग्री-बिजनेस मॉडल भी बना सकता है। खेत में फसल उगेगी, गांव में प्रोसेसिंग होगी, ऑनलाइन सेल होगी और शहर के ग्राहक तक हेल्दी प्रोडक्ट पहुंचेगा।

मिट्टी की सेहत, खेती की असली वेल्थ
खेती की सबसे बड़ी पूंजी मिट्टी है। अगर मिट्टी कमजोर हो जाए, तो बीज, पानी और मेहनत का असर भी कम हो जाता है। इसलिए ऑर्गेनिक खेती की बात मिट्टी से शुरू होती है।

नेशनल मिशन ऑन नेचुरल फार्मिंग का फोकस मिट्टी की सेहत सुधारने, खेती की लागत घटाने और खेती को ज्यादा टिकाऊ बनाने पर है। यह सोच किसानों को बताती है कि खेत को सिर्फ उत्पादन की जगह न मानें, बल्कि एक जीवित सिस्टम की तरह संभालें।

मिट्टी हेल्दी, फसल रेडी, किसान की तैयारी हुई स्टेडी।
लागत कम, भरोसा ज्यादा
कई किसानों की बड़ी चिंता खेती की बढ़ती लागत है। बीज, खाद, दवा, मजदूरी और सिंचाई का खर्च फसल बेचने से पहले ही शुरू हो जाते हैं। ऑर्गेनिक और नेचुरल फार्मिंग का एक बड़ा फायदा यह हो सकता है कि किसान धीरे-धीरे लोकल इनपुट पर भरोसा बढ़ाए।

अगर गांव में ही कंपोस्ट बने, गोबर से खाद बने, जैविक घोल तैयार हो और फसल चक्र अपनाया जाए, तो बाहर से खरीदे जाने वाले इनपुट पर निर्भरता कम हो सकती है। इससे छोटे किसान को राहत मिलती है।

पीकेवीवाई यानी परंपरागत कृषि विकास योजना ऑर्गेनिक फार्मिंग को क्लस्टर मॉडल से बढ़ावा देती है।इसमें उत्पादन, प्रोसेसिंग, सर्टिफिकेशन और मार्केटिंग जैसे पहलुओं पर ध्यान दिया जाता है।

क्लस्टर मॉडल से टीम वर्क
ऑर्गेनिक खेती अकेले किसान के लिए कठिन लग सकती है, लेकिन अगर कई किसान मिलकर काम करें, तो ट्रेनिंग, इनपुट, सर्टिफिकेशन और मार्केटिंग आसान हो सकती हैं। यही क्लस्टर मॉडल की ताकत है।

क्लस्टर में किसान एक जैसे तरीके अपनाते हैं। वे मिलकर सीखते हैं, एक-दूसरे के खेत देखते हैं, कॉमन ट्रेनिंग लेते हैं, एक साथ सर्टिफिकेशन की तैयारी करते हैं और फिर मिलकर मार्केट तक पहुंच बनाते हैं।

यूथ इस मॉडल में मैनेजमेंट संभाल सकते हैं। कोई किसान डेटा रखेगा, कोई खरीदार से बात करेगा, कोई पैकेजिंग देखेगा, कोई सोशल मीडिया संभालेगा और कोई ऑनलाइन ऑर्डर लेगा। इससे खेती में टीम वर्क आता है

क्लस्टर से कनेक्ट, मार्केट पर इफेक्ट, यूथ को मिला एग्री मैनेजमेंट सेट।
गंगा किनारे ग्रीन खेती की राह

यूपी में गंगा किनारे खेती की बड़ी भूमिका है। यहां ऑर्गेनिक और नेचुरल खेती का असर केवल किसानों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह नदी, मिट्टी और गांव की इकॉनमी से भी जुड़ता है।

पीआईबी के अनुसार, गंगा किनारे ऑर्गेनिक फार्मिंग और एग्रो-फॉरेस्ट्री का क्षेत्र बढ़ा है। इसमें यूपी में 42,180 हेक्टेयर क्षेत्र का जिक्र किया गया है। यह दिखाता है कि गंगा बेल्ट में केमिकल कम खेती को नई दिशा दी जा रही है।

ऐसे इलाकों में यूथ किसान ऑर्गेनिक गेहूं, दाल, सब्जी, मोटे अनाज, मसाले, और लोकल फूड प्रोडक्ट्स पर काम कर सकते हैं। इससे खेत भी संभलेगा और बाजार में हेल्दी प्रोडक्ट की डिमांड भी पूरी होगी।

सर्टिफिकेशन से भरोसा, ग्राहक से कनेक्ट
ऑर्गेनिक प्रोडक्ट बेचने में सबसे बड़ा सवाल भरोसे का होता है। ग्राहक जानना चाहता है कि जो सामान वह खरीद रहा है, वह सच में ऑर्गेनिक है या नहीं। इसलिए सर्टिफिकेशन जरूरी बनता है।

पीजीएस इंडिया छोटे किसान समूहों के लिए एक लोकल क्वालिटी एश्योरेंस सिस्टम है। इससे किसान समूह ऑर्गेनिक तरीके से खेती करने और उसका भरोसेमंद रिकॉर्ड रखने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।

यूथ यहां खेत का रिकॉर्ड रख सकते हैं, फोटो, वीडियो, इनपुट डिटेल, फसल डिटेल और बिक्री का डेटा संभाल सकते हैं। यह सब आगे चलकर सर्टिफिकेशन और मार्केटिंग में मदद करता है।

सर्टिफिकेट से ट्रस्ट, ग्राहक को भरोसा फर्स्ट।
फार्म से ब्रांड, यूथ का नया एग्री स्टार्टअप
ऑर्गेनिक खेती तभी ज्यादा कमाई दे सकती है, जब फसल को सही तरह से बेचा जाए। केवल मंडी में सामान्य दाम पर बेचने से किसान को पूरा फायदा नहीं मिल पाता। इसलिए ऑर्गेनिक खेती के साथ ब्रांडिंग और वैल्यू एडिशन जरूरी हैं।

किसान यहां नया मॉडल बना सकते हैं। कोई ऑर्गेनिक आटा बेच सकता है, कोई दाल की पैकिंग कर सकता है, कोई गुड़, सरसों तेल, हल्दी, चना, बाजरा, सब्जी बॉक्स या फार्म फ्रेश किट बना सकता है और कोई सब्सक्रिप्शन मॉडल से शहरों में साप्ताहिक ऑर्गेनिक बॉक्स भेज सकता है।

जैविक खेती पोर्टल जैसे प्लेटफॉर्म किसानों, लोकल ग्रुप्स, खरीदारों और इनपुट सप्लायर्स को जोड़ने की दिशा में काम करते हैं। इससे किसान को अपने प्रोडक्ट को बड़े ग्राहक बेस तक दिखाने का मौका मिलता है।

फार्म से ब्रांड, यूथ का नया एग्री स्टार्टअप
ऑर्गेनिक खेती तभी ज्यादा कमाई दे सकती है, जब फसल को सही तरह से बेचा जाए। केवल मंडी में सामान्य दाम पर बेचने से किसान को पूरा फायदा नहीं मिल पाता। इसलिए ऑर्गेनिक खेती के साथ ब्रांडिंग और वैल्यू एडिशन जरूरी हैं।

किसान यहां नया मॉडल बना सकते हैं। कोई ऑर्गेनिक आटा बेच सकता है, कोई दाल की पैकिंग कर सकता है, कोई गुड़, सरसों तेल, हल्दी, चना, बाजरा, सब्जी बॉक्स या फार्म फ्रेश किट बना सकता है और कोई सब्सक्रिप्शन मॉडल से शहरों में साप्ताहिक ऑर्गेनिक बॉक्स भेज सकता है।

जैविक खेती पोर्टल जैसे प्लेटफॉर्म किसानों, लोकल ग्रुप्स, खरीदारों और इनपुट सप्लायर्स को जोड़ने की दिशा में काम करते हैं। इससे किसान को अपने प्रोडक्ट को बड़े ग्राहक बेस तक दिखाने का मौका मिलता है।

फार्म से ब्रांड, यूथ के हाथ में कमांड।
महिलाएं और FPO, गांव की नई टीम
ऑर्गेनिक खेती में महिलाओं की भूमिका बहुत मजबूत हो सकती है। गांव में कंपोस्ट बनाना, बीज संभालना, सब्जी उगाना, अचार-मसाला बनाना, पैकिंग करना और लोकल सेल संभालना, ये सारे काम महिलाओं के अनुभव से जुड़े हैं।

अगर महिला समूह और FPO इस मॉडल से जुड़ें, तो गांव में छोटा प्रोसेसिंग और पैकिंग सिस्टम बन सकता है। किसान फसल उगाएगा, महिला समूह उसे साफ करेगा, सुखाएगा, पैक करेगा और ब्रांडिंग में भी मदद करेगा, वहीं यूथ ऑनलाइन सेल और डिलीवरी संभालेंगे।

इस तरह ऑर्गेनिक खेती केवल खेत का काम नहीं रहेगी, बल्कि यह गांव की पूरी टीम का बिजनेस भी बन सकती है।

ऑर्गेनिक खेती से रोजगार की नई राह
ऑर्गेनिक खेती यूथ को खेती से जोड़ने का नया रास्ता इसलिए बन सकती है, क्योंकि इसमें सिर्फ फसल उगाने का काम नहीं है। इसमें कंपोस्ट यूनिट, वर्मी-कंपोस्ट, नर्सरी, बीज बैंक, पैकेजिंग, प्रोसेसिंग, फार्म विजिट, ट्रेनिंग, डिजिटल मार्केटिंग और होम डिलीवरी जैसे कई काम जुड़ते हैं।

आज यूथ नौकरी के साथ-साथ अपना छोटा बिजनेस भी चाहता है। ऑर्गेनिक खेती उसे गांव में रहकर ऐसा मौका दे सकती है। वह परिवार की जमीन को नई सोच से जोड़ सकता है, पुराने खेत को नए ब्रांड में बदल सकता है और ग्राहक को यह बता सकता है कि उसका खाना कहां से आया है और कैसे उगा है।

यही ट्रेसबिलिटी और भरोसा आने वाले समय में एग्री-बिजनेस की बड़ी ताकत बन सकते है।

ग्रीन खेती, नया भरोसा
ऑर्गेनिक खेती यूपी के लिए केवल खेती की नई तकनीक नहीं है, बल्कि यह मिट्टी बचाने, किसान की लागत घटाने, यूथ को गांव से जोड़ने और हेल्दी फूड मार्केट तक पहुंच बनाने की नई सोच है।

जब खेत में जैविक इनपुट बढ़ेंगे, क्लस्टर बनेंगे, सर्टिफिकेशन मिलेगा, पैकेजिंग बेहतर होगी और ऑनलाइन मार्केट से कनेक्ट बनेगा, तो किसान को नई पहचान मिल सकती है। यूथ खेती को फिर से करियर और बिजनेस की नजर से देख सकते हैं।

यूपी की खेती का भविष्य केवल ज्यादा उत्पादन में नहीं, बल्कि बेहतर क्वालिटी, कम लागत, मजबूत मिट्टी और भरोसेमंद मार्केट में भी है। ऑर्गेनिक खेती इसी दिशा में एक नया मॉडल बन सकती है।

Share This Article
Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *