भाखड़ा नहरों ने बदली हरियाणा की तकदीर, सूखे खेतों से बना देश का कृषि पावरहाउस

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 भिवानी
आठ जुलाई 1954 को तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने भाखड़ा-नांगल परियोजना की सबसे बड़ी नहर का उद्घाटन किया था। तब शायद किसी ने नहीं सोचा होगा कि सतलुज का यह पानी आने वाले दशकों में हरियाणा की तकदीर बदल देगा।

वर्ष 1966 में राज्य गठन के समय जहां खेती का बड़ा हिस्सा मानसून पर निर्भर था, वहीं आज हरियाणा देश के सबसे अधिक सिंचित और सर्वाधिक उत्पादक कृषि राज्यों में शामिल है। इस बदलाव की सबसे मजबूत कड़ी भाखड़ा नहर प्रणाली, पश्चिमी यमुना नहर और दक्षिण हरियाणा तक पहुंची जवाहरलाल नेहरू लिफ्ट कैनाल बनी हैं।

हरियाणा आर्थिक सर्वेक्षण 2024-25, स्टेट स्टैटिस्टिकल एब्स्ट्रैक्ट, सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग और बीबीएमबी (भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड) के अनुसार प्रदेश में अब करीब 14,800 किलोमीटर लंबा नहर नेटवर्क है।

इसके जरिए लगभग पूरे कृषि क्षेत्र को सिंचाई सुविधा उपलब्ध हो रही
इसके जरिए लगभग पूरे कृषि क्षेत्र को सिंचाई सुविधा उपलब्ध हो रही है। सिरसा, फतेहाबाद, हिसार और भिवानी जैसे राजस्थान सीमा से लगे जिले हों या महेंद्रगढ़, रेवाड़ी और चरखी दादरी का दक्षिणी शुष्क क्षेत्र, यहां नहरों ने खेती, पेयजल और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की तस्वीर बदल दी है।

वर्ष 1966 के बाद सिंचाई सुविधाओं के विस्तार ने हरित क्रांति को गति दी। गेहूं और धान उत्पादन में कई गुना वृद्धि हुई, फसल सघनता बढ़ी, बागवानी और डेयरी को बढ़ावा मिला तथा ग्रामीण आय में लगातार सुधार हुआ।

भले ही आजकल नहरों में पानी कम आ रहा है पर आज हरियाणा देश के केंद्रीय पूल में गेहूं और चावल देने वाले प्रमुख राज्यों में शामिल है। आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार प्रति व्यक्ति आय के मामले में हरियाणा देश के अग्रणी राज्यों में है।

कृषि विभाग के डिप्टी डायरेक्टर डॉ. विनोद फौगाट ने कहा कि हरियाणा की हरित क्रांति की असली ताकत भरोसेमंद सिंचाई रही और इसका सबसे बड़ा आधार भाखड़ा नहर प्रणाली है।भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड की भाखड़ा परियोजना उत्तर भारत की खाद्य सुरक्षा और कृषि समृद्धि की आधारशिला कही जा सकती है।

 

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