Stock Market Crash: शेयर बाजार में भूचाल, मिनटों में ₹7.50 लाख करोड़ का नुकसान, निवेशकों में हड़कंप

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मुंबई 

शेयर बाजार में कोहराम (Stock Market Crash) मचा हुआ है. सेंसेक्स-निफ्टी क्रैश नजर आ रहे हैं. बीएसई की लार्जकैप कैटेगरी हो या मिडकैप हर ओर लाल-लाल रंग पसरा है. बीते कारोबारी दिन बुधवार को आई तेजी मार्केट ओपन होने के साथ ही हवा हो गई. खुलने के कुछ ही मिनटों बाद BSE Sensex 1200 अंक से ज्यादा बिखर गया, तो वहीं NSE Nifty भी 380 अंक से ज्यादा का गोता लगा गया. बाजार में आई इस बड़ी गिरावट के चलते शेयर बाजार निवेशकों को तगड़ा घाटा हुआ है और एक झटके में उनकी दौलत 7.5 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा घट गई है। 

सेंसेक्स-निफ्टी पलक झपकते ही क्रैश 
शेयर मार्केट में बीते कारोबारी दिन बुधवार को बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 609 अंक की तेजी लेकर 77,496 पर क्लोज हुआ था. वहीं गुरुवार को इस इंडेक्स ने तेज गिरावट लेकर 77,014 पर ओपनिंग की. इसके बाद मिनटों में ही Sensex तेजी से फिसलते हुए 1238 अंक टूट गया और 76,258 के लेवल पर कारोबार करता नजर आया। 

न सिर्फ सेंसेक्स, बल्कि NSE Nifty का भी शुरुआत से ही बुरा हाल देखने को मिला. बुधवार को ये 50 शेयरों वाला इंडेक्स 182 अंक उछलकर 24,177 पर बंद हुआ था, लेकिन गुरुवार को ये 23,996 पर खुला था. इसके बाद सेंसेक्स के कदम से कदम मिलाकर चलते हुए निफ्टी 381 अंकों की बड़ी गिरावट लेकर 23,796 पर आ गया। 

निवेशकों के 750000Cr स्वाहा
शेयर मार्केट क्रैश होने का सीधा असर मार्केट इन्वेस्टर्स पर देखने को मिला. बीते कारोबारी दिन बुधवार को तूफानी तेजी के चलते बाजार बंद होने पर बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन (BSE MCap) 4.69 लाख करोड़ रुपये दर्ज किया गया था. वहीं गुरुवार को शुरुआती कुछ मिनट के कारोबार के दौरान ही ये गिरकर 4.61 लाख करोड़ रुपये के लेवल पर आ गया. इस हिसाब से कैलकुलेशन करें, तो महज कुछ मिनटों के कारोबार के दौरान ही शेयर बाजार निवेशकों के 7,51,481.28 करोड़ रुपये स्वाहा हो गए। 

बाजार में भूचाल के कारण क्या? 
Stock Market Crash के पीछे के कारणों की बात करें, तो अमेरिका और ईरान के बीच तनातनी जारी है. डोनाल्ड ट्रंप होर्मुज को लेकर पीछे हटने को तैयार नहीं हैं और एक बयान में US Hormuz Strait Blockde को जारी रखने की बात कहकर ग्लोबल टेंशन बढ़ा दी है. इसका सीधा असर अंतरराष्ट्रीय मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों (Crude Oil Price) पर देखने को मिला है और ये अचानक उछलकर 121 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं. इससे महंगाई का जोखिम फिर बढ़ गया है और भारत समेत दुनियाभर के शेयर मार्केट दबाव में नजर आए हैं। 

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