पंजाब में शिशु मृत्यु दर में 17.56% की बढ़ोतरी, अमृतसर सबसे आगे; जालंधर-लुधियाना की स्थिति भी चिंताजनक

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पंजाब में शिशु मृत्यु दर में 17.56% की बढ़ोतरी, अमृतसर सबसे आगे; जालंधर-लुधियाना की स्थिति भी चिंताजनक
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 जालंधर/लुधियाना 

पंजाब में शिशु मृत्यु दर में 17.56 फीसदी की बढ़ोतरी हो गई है। शहरों में स्थिति ज्यादा गंभीर है जहां शिशु मृत्यु दर के कुल मामलों में से 90% मौतें हो रही हैं। अमृतसर में शिशु मृत्यु दर अधिक है। उसके बाद जालंधर और लुधियाना में अधिक मौतें हो रही हैं। नागरिक पंजीकरण प्रणाली पर आधारित महत्वपूर्ण सांख्यिकी रिपोर्ट 2024 में यह बात सामने आई है।

रिपोर्ट के अनुसार पिछले कुछ साल से प्रदेश में शिशु मृत्यु के मामले बढ़ते जा रहे हैं। वर्ष 2023 में शिशु मृत्यु के 2272 मामले सामने आए थे जो 2024 में बढ़कर 2671 हो गए हैं। वर्ष 2020 में 1884, 2021 में 1830, 2022 में 2336 बच्चों की मौत हुई। इनमें समय से पहले प्रसव, जन्म के समय ऑक्सीजन की कमी, संक्रमण और प्रसवपूर्व देखभाल की कमी है। इसके अलावा स्वास्थ्य सुविधाओं, स्वच्छता की कमी, कुपोषण और दस्त रोग भी शिशु मृत्यु दर के प्रमुख कारण हैं।

वहीं, राष्ट्रीय स्तर पर शिशु मृत्यु दर में 17.12% की कमी आई है। वर्ष 2023 में जहां 1.45 लाख बच्चों की मौत हुई थी जो अब कम होकर 1.20 लाख हो गई है।

शहरों में स्थिति अधिक गंभीर
प्रदेश में गांवों के मुकाबले शहरों की स्थिति अधिक गंभीर है जहां शिशु मृत्यु दर के अधिक मामले सामने आ रहे हैं। वर्ष 2024 के दौरान जहां ग्रामीण क्षेत्रों में शिशु मृत्यु दर के 258 मामले सामने आए हैं। वहीं शहरों में 2413 बच्चों की मौत हुई है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार गांवों और शहरों में स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान करने के लिए प्रयास किया जा रहा है ताकि मृत्यु दर को कम किया जा सके।
जिला, सब डिवीजनल अस्पतालों और कम्युनिटी हेल्थ सेंटरों पर विशेषज्ञ डॉक्टरों की तैनाती की जा रही है। पीजी कोर्स जॉइन करने के बॉन्ड सरकार सख्ती से लागू कर रही है। प्रदेश में शिशु मृत्यु दर को कम करने के लिए प्रसवपूर्व देखभाल में सुधार, कुपोषण को कम करना, स्वच्छता में सुधार और संक्रमण को रोकने के लिए विभिन्न उपायों पर काम किया जा रहा है।  

अमृतसर में सबसे अधिक 835 व जालंधर में 368 मौतें 
रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2024 के दौरान अमृतसर में सबसे अधिक 835 बच्चों की मौत हुई है। जालंधर 368 और लुधियाना में 348 बच्चों की मौत हुई है। यही कारण है कि इन जिलों में स्वास्थ्य विभाग की तरफ से विशेष ध्यान दिया जा रहा है। विभाग की तरफ से यहां अस्पतालों में अधिक सुविधाएं दी जा रही हैं। साथ ही डॉक्टरों और स्टाफ की कमी पूरी किया जा रहा है। लोगों के बीच जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है ताकि इन शहरों में शिशु मृत्यु दर में कमी लाई जा सके।

बाकी जिलों में यह है स्थिति  
जिला – मौतें
अमृतसर – 835
बरनाला – 18
बठिंडा – 187
फरीदकोट – 169
फाजिल्का – 32
फतेहगढ़ साहिब – 5
फिरोजपुर – 8
गुरदासपुर – 32
होशियारपुर – 60
जालंधर – 368
कपूरथला – 12
लुधियाना – 348
मालेरकोटला – 12
मानसा – 5
मोगा – 55
श्री मुक्तसर साहिब – 15
पठानकोट – 36
पटियाला – 331
रूपनगर – 4
संगरूर – 16
मोहाली – 87
एसबीएस नगर – 25
तरनतारन – 11

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