अलनीनो की मार से झारखंड में बारिश का संकट, धान की रोपाई पर पड़ा बड़ा असर

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रांची
झारखंड में अलनीनो का असर गहराता जा रहा है. बीते साल राज्य में मॉनसून बेहतर था. पिछले साल अब तक राज्य में 417 मिमी बारिश हो गई थी. इस वर्ष अब तक मात्र 129 मिमी ही बारिश हुई है. राज्य में कम बारिश का असर खेती-बारी के साथ-साथ जलाशयों में भी दिख रहा है. बीते साल इस समय से खरीफ में करीब 31 फीसदी खेतों में रोपा हो गया था. इस वर्ष अब तक जिलों में रोपा भी शुरू नहीं हो पाया है. विभागीय मंत्री हर 15 दिनों में खरीफ खेती की तैयारी की समीक्षा कर रही है.

रांची में 205, गढ़वा जिले में सिर्फ 18 मिमी बारिश
बीते साल रांची और पश्चिम सिंहभूम में जुलाई के पहले सप्ताह तक 600 मिमी से अधिक बारिश हो गयी थी. इस वर्ष रांची में अब तक 205 मिमी बारिश हुई है. वहीं, पश्चिम सिंहभूम में अब तक मात्र 136 मिमी ही बारिश हुई है. इस वर्ष तो गढ़वा में मात्र 18 मिमी ही बारिश हुई है. वहीं, इस वर्ष राज्य में सामान्य से भी करीब 45 मिमी बारिश हुई थी. राज्य के एक भी जिले में सामान्य बारिश नहीं हुई है. सभी जिलों की स्थिति खराब है.

झारखंड में बारिश की कमी से धान की रोपाई हुई कम
बीते साल (2025) में जुलाई के पहले सप्ताह में 95 हजार हेक्टेयर में धान लग गया था. इस वर्ष राज्य के अधिसंख्य जिलों में अब तक धान लगना चालू भी नहीं हुआ है. अब तक मात्र तीन हजार हेक्टेयर में ही धान लग पाया है. यह संताल परगना के जिले हैं. कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार 2025 में दक्षिणी छोटानागपुर प्रमंडल में 70 हजार हेक्टेयर में धान का रोपा जुलाई के पहले सप्ताह में ही हो गया था. कोल्हान में भी करीब 14 हजार हेक्टेयर में धान लग गया था.

क्या कहना है मंत्री का ?
कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा है कि अलनीनो के कारण झारखंड में सामान्य से लगभग 50 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गयी है. यह चिंता का विषय है. हालांकि सरकार ने समय रहते सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली है और स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है. झारखंड देश का पहला राज्य है, जिसने संभावित सुखाड़ को देखते हुए सबसे पहले अपना कंटिन्जेसी प्लान केंद्र सरकार को उपलब्ध कराया है.

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