हरियाणा का बड़ा लक्ष्य: 31 मार्च 2027 तक पूरा प्रदेश होगा लीगेसी वेस्ट मुक्त

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चंडीगढ़
 हरियाणा सरकार ने 31 मार्च 2027 तक पूरे प्रदेश को लीगेसी वेस्ट (बरसों से एक स्थान पर जमा कूड़ा) मुक्त बनाने का लक्ष्य तय किया है। सरकार के अनुसार राज्य के 75 लीगेसी वेस्ट डंपसाइट्स में से 60 का वैज्ञानिक बायो-माइनिंग के माध्यम से निस्तारण किया जा चुका है, जबकि शेष 15 डंपसाइट्स को निर्धारित समय सीमा तक पूरी तरह समाप्त अथवा वैज्ञानिक तरीके से निस्तारित किया जाएगा। इसके साथ ही सार्वजनिक स्थानों, नालों, जल स्रोतों और खाली भूखंडों पर कचरा फेंकने वालों के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया सख्त की जाएगी।

राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) में दायर एक जनहित याचिका पर हरियाणा सरकार ने शहरी स्थानीय निकाय विभाग के माध्यम से विस्तृत शपथपत्र दाखिल किया है। इसमें पूरे प्रदेश में ठोस कचरा प्रबंधन की वर्तमान स्थिति, अब तक हुई कार्रवाई और समयबद्ध कार्ययोजना का ब्योरा दिया गया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित कराया जा रहा है।

सरकार के अनुसार ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमों का उल्लंघन करने वालों पर अब तक 7.63 करोड़ रुपये का पर्यावरण मुआवजा वसूला जा चुका है। जनवरी से अप्रैल 2026 के बीच 3,486 चालान किए गए। सरकार ने कहा है कि सार्वजनिक स्थानों, नालों, जल स्रोतों और खाली भूखंडों पर कचरा फेंकने वालों के खिलाफ अभियान तेज होगा।

हरियाणा के शहरी निकाय मंत्री विपुल गोयल के मुताबिक, कचरा प्रबंधन व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने के लिए अब अलग-अलग नगर निकायों की बजाय जिला स्तर पर सिंगल ई-टेंडर माडल लागू करने की योजना है। प्रदेश के 87 शहरी निकायों के लिए कचरा प्रसंस्करण स्थलों की पहचान की जा चुकी है।

प्लास्टिक और पैकेजिंग कचरे के प्रभावी प्रबंधन के लिए 23 निर्माता, 61 आयातक और 21 ब्रांड मालिकों सहित कुल 105 कंपनियों को एक्सटेंडेड प्रोड्यूसर रिस्पांसिबिलिटी (इपीआर) के दायरे में लाया गया है। इन कंपनियों को अपने उत्पादों से उत्पन्न कचरे के संग्रहण और वैज्ञानिक निस्तारण की जिम्मेदारी निभानी होगी।

राज्य में 14,889 कबाड़ बीनने वालों की पहचान
हरियाणा सरकार ने शपथपत्र में यह भी बताया कि प्रदेशभर में 14,889 कबाड़ बीनने वालों की पहचान की जा चुकी है, जिनमें से 5,356 का पंजीकरण किया गया है। इसके अलावा 217 स्वयं सहायता समूहों को कचरा प्रबंधन से जोड़ा गया है तथा 1,515 वार्ड समितियों का गठन किया गया है। घर-घर सूखा और गीला कचरा अलग-अलग एकत्र करने की व्यवस्था को मजबूत करने के लिए व्यापक जनजागरूकता अभियान भी चलाए जा रहे हैं।

रेवाड़ी के प्रकाश यादव ने दायर की थी जनहित याचिका
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) में यह मामला रेवाड़ी जिले के गांव खरखड़ा निवासी सामाजिक कार्यकर्ता प्रकाश यादव की जनहित याचिका के बाद सामने आया। हरियाणा सरकार द्वारा दाखिल शपथपत्र के साथ अब पूरे प्रदेश में ठोस कचरा प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण के लिए समयबद्ध कार्ययोजना पर अमल की प्रक्रिया तेज होने की उम्मीद की जा सकती है।

 

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