ई-रिक्शा चालकों के सामने नई मुसीबत, ‘चाइनीज ऐप’ से हैक हो रहे वाहन

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ई-रिक्शा चालकों के सामने नई मुसीबत, ‘चाइनीज ऐप’ से हैक हो रहे वाहन
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 ग्वालियर

ग्वालियर की सड़कों पर इन दिनों ई-रिक्शा चालकों के सामने एक अजीबोगरीब और बेहद परेशान करने वाली मुसीबत खड़ी हो गई है। कुछ शरारती और सिरफिरे युवक राह चलते ई-रिक्शा को निशाना बना रहे हैं। ये युवक 'चाइनीज मोबाइल एप्लीकेशन' का इस्तेमाल कर चलते-चलते ही ई-रिक्शा की इलेक्ट्रिक बैटरी को रिमोटली लाक कर देते हैं।

बैटरी लॉक होते ही गाड़ी का चक्का जाम हो जाता है और वह टस से मस नहीं होती। इस नए किस्म की खुराफात से न सिर्फ गरीब ई-रिक्शा चालक परेशान होना पड़ रहा है, बल्कि पुलिस महकमा भी हैरान है। पुलिस के पास ऐसी एक-दो नहीं, बल्कि दर्जनों शिकायतें पहुंच चुकी हैं, लेकिन तकनीकी पेंच और अचानक गायब हो जाने वाले ऐसे सिरफिरों के कारण पुलिस के हाथ अब तक खाली हैं।

ऐसे दिया जा रहा वारदात को अंजाम

पीड़ित ई-रिक्शा चालकों ने अपनी आपबीती सुनाते हुए बताया कि इन दिनों बाजार में आने वाले नए ई-रिक्शा आधुनिक फीचर्स और ब्लूटूथ कनेक्टिविटी से लैस हैं। शरारती तत्व इसी का फायदा उठा रहे हैं।
  
कनेक्टिविटी की कमजोरी: शरारती युवक ई-रिक्शा के पास आते हैं या पीछे बैठते हैं और अपने मोबाइल ऐप के जरिए रिक्शा के ब्लूटूथ सिग्नल को हैक कर लेते हैं।
   
 बैटरी लॉक: ऐप के जरिए वे रिक्शा के 'बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम' में सेंध लगाकर उसे लाक कर देते हैं।
 
 एजेंसी के चक्कर: एक बार बैटरी लॉक होने के बाद रिक्शा सड़क पर ही ठप हो जाता है। इसे दोबारा चालू करने का कोई तरीका चालकों के पास नहीं होता। मजबूरी में उन्हें भारी-भरकम किराया देकर रिक्शा खिंचवाकर संबंधित कंपनी की एजेंसी ले जाना पड़ता है, जहां साफ्टवेयर के जरिए ही इसे दोबारा अनलाक किया जाता है।

दिनभर की कमाई बैटरी खुलवाने में चली गई

ग्वालियर थाने पहुंचे रमेश कुमार, नवीन कुशवाह सहित करीब आधा दर्जन ई-रिक्शा चालकों के साथ ऐसा हुआ। इन लोगों ने बताया कि पूरे दिन में 400 से 500 रुपये की कमाई होती है। ई-रिक्शा लाक होने के कारण एक बार में करीब एक हजार रुपये तक खर्च हो जाते हैं।

साइबर एक्सपर्ट के मुताबिक

यह मामला बीएमएस हैकिंग से जुड़ा है। कई चाइनीज और सस्ते ई-रिक्शा या उनकी बैटरियों में डिफाल्ट ब्लूटूथ पासवर्ड (जैसे 0000 या 1234) होता है। शरारती तत्व इंटरनेट पर मौजूद एपीके फाइलों या चाइनीज क्लोन ऐप्स के जरिए इन डिफाल्ट पासवर्ड को क्रैक कर लेते हैं। या कई कंपनियां पासवर्ड से लैस ही नहीं करती। ब्लूटूथ आन रख देती हैं।
ई-रिक्शा चालक रखें इन बातों का ध्यान

 डिफाल्ट पासवर्ड बदलें: ई-रिक्शा खरीदते ही चालक सबसे पहले अपनी बैटरी के ब्लूटूथ का डिफाल्ट पासवर्ड बदलें।
 ब्लूटूथ विजिबिलिटी बंद रखें: यदि संभव हो, तो रिक्शा के ब्लूटूथ की 'विजिबिलिटी' को 'हिडन' मोड पर रखें ताकि कोई बाहरी डिवाइस उसे सर्च न कर सके।

 लागिन-पासवर्ड याद रखें: जब ई-रिक्शा खरीदते हैं तो कंपनी द्वारा लागिन-पासवर्ड, कंपनी का एप डाउनलोड कर दिया जाता है। इसे हमेशा याद रखें। कंपनी सामान्य पासवर्ड रखती है। इसके अपने हिसाब से बदल दें।

पुलिस की अपील- संदिग्धों की तुरंत दें सूचना

इस मामले में पुलिस अधिकारियों का कहना है कि शिकायतें लगातार मिल रही हैं। साइबर सेल को इस मामले की जांच में लगाया गया है और उस ऐप को भी ट्रेस करने की कोशिश की जा रही है जिससे यह लाक किया जा रहा है। आरोपित राह चलते या सवारी बनकर इस हरकत को अंजाम देते हैं, इसलिए उन्हें तुरंत पकड़ना चुनौती बना हुआ है।

पुलिस ने चालकों से अपील की है कि यदि कोई सवारी रिक्शा में बैठकर मोबाइल पर संदिग्ध हरकत करती दिखे, तो तुरंत नजदीकी पुलिस थाने को सूचना दें।

आटो-टेंपो चालकों पर शक और सोशल मीडिया का असर

पुलिस को इस मामले में आटो-टेंपो चालकों पर शक है। ऐसा इनपुट मिला है। सवारी के चक्कर में आटो, टेंपो चालक यह हरकत कर रहे हैं।

ई-रिक्शा लाक करने की वीडियो इंस्टा, फेसबुक, यूट्यूब पर इन दिनों खूब चल रही हैं। इसी में एप का प्रचार भी हो रहा है।

 

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