हरियाणा के सरकारी स्कूलों में अब Robotics और AI की पढ़ाई, 391 आधुनिक लैब तैयार

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 यमुनानगर
 सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों के लिए विज्ञान की पढ़ाई किताबों तक सीमित नहीं रहेगी। वे रोबोट बनाएंगे, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआइ) पर काम करेंगे, 3-डी प्रिंटर से माडल तैयार करेंगे और अपने आइडिया को तकनीक के जरिए हकीकत में बदलना सीखेंगे।

क्योंकि प्रदेश के 391 राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक स्कूलों में इसी माह अटल टिंकरिंग लैब (एटीएल) शुरू हो रही है। इसके लिए स्कूलों में सामान पहुंच चुका है, वहीं मई में शिक्षकों को प्रशिक्षण भी दिया जा चुका है। ग्रीष्मकालीन अवकाश के बाद स्कूल खुलते ही यह लैब क्रियान्वित की जा रही हैं। इससे सरकारी स्कूलों के हजारों विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीकी शिक्षा और नवाचार का मंच मिल सकेगा।

अटल टिंकरिंग लैब की शुरुआत वर्ष 2018 में नीति आयोग ने अटल इनोवेशन मिशन के तहत की थी। उस समय निर्धारित मानकों के आधार पर प्रदेश के ज्यादातर निजी स्कूलों मं ही यह सुविधा मिल सकी थी, जबकि अधिकांश सरकारी स्कूल इससे वंचित रह गए थे।

नीति आयोग की तर्ज पर हरियाणा सरकार ने अपने संसाधनों से 391 सरकारी स्कूलों में 2026-27 के शैक्षणिक सत्र में अटल टिंकरिंग लैब स्थापित करने का निर्णय लिया। इसके लिए फरवरी से स्कूलों में लैब का सामान भेजना शुरू कर दिया गया था, जो अब लगभग सभी स्कूलों में पहुंच चुका है। साथ ही मई में शिक्षकों को लैब से संबंधित प्रशिक्षण भी दिया गया।

हिसार में सबसे ज्यादा 29 लैब, रोहतक में सबसे कम पांच
सबसे ज्यादा हिसार के 29 स्कूलों में लैब स्थापित हो रही हैं। इसके बाद जींद व सिरसा में 26-26, यमुनानगर में 23, अंबाला, भिवानी व फतेहाबाद में 22-22, करनाल में 21, कैथल में 20, पानीपत व सोनीपत में 19-19, कुरुक्षेत्र, नूंह व पलवल में 17-17, महेंद्रगढ़ में 16 और गुरुग्राम में 15 लैब स्थापित होंगी। चरखी दादरी, पंचकूला व रेवाड़ी में 11-11, फरीदाबाद में 10 व झज्जर में नौ लैब हैं। सबसे कम पांच लैब रोहतक में हैं।

नवाचार, वैज्ञानिक सोच व तकनीकी कौशल का होगा विकास
जिला विज्ञान विशेषज्ञ विशाल सिंघल ने बताया कि जुलाई में लैब शुरू कराने का प्रयास है। इनमें छात्र-छात्राएं रोबोटिक्स, एआइ, 3-डी प्रिंटिंग, इलेक्ट्रानिक्स, सेंसर, माइक्रोकंट्रोलर व कोडिंग का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्राप्त करेंगे।

यात्री छात्र केवल सिद्धांत नहीं पढ़ेंगे, बल्कि मॉडल तैयार करेंगे, प्रोटोटाइप बनाएंगे व दैनिक जीवन की समस्याओं के तकनीकी समाधान विकसित करने का अभ्यास भी करेंगे। इससे विद्यार्थियों में नवाचार, वैज्ञानिक सोच व तकनीकी कौशल का विकास होगा।

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