बक्सर में आर्द्रा स्नान पर उमड़ा आस्था का सैलाब, 20 हजार श्रद्धालुओं ने गंगा में लगाई डुबकी

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बक्सर.

प्रसिद्ध रामरेखा घाट पर बुधवार तड़के से ही आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। घाट के पुजारियों के अनुसार, आद्रा नक्षत्र के अवसर पर 20 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने पवित्र गंगा में स्नान किया। बड़ी संख्या में लोग मुंडन संस्कार कराने के लिए भी घाट पहुंचे।

पंडित धनजी तिवारी ने कहा कि गुरुवार को पड़ने वाली भीमसेनी निर्जला एकादशी के कारण गंगा स्नान के लिए श्रद्धालुओं की संख्या और बढ़ने की संभावना है। ज्योतिषाचार्य नरोत्तम द्विवेदी ने बताया कि ग्रहों के राजा सूर्य 22 जून की रात 8:27 बजे मृगशिरा नक्षत्र से निकलकर राहु के स्वामित्व वाले आद्रा नक्षत्र में प्रवेश कर चुके हैं। सूर्य का यह गोचर छह जुलाई तक रहेगा।

ज्योतिष एवं कृषि की दृष्टि से आद्रा नक्षत्र को अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि इसे मानसून के आगमन का संकेतक माना जाता है। उन्होंने बताया कि पंचांग के अनुसार जून के अंतिम दिनों तथा जुलाई के प्रथम सप्ताह में वर्षा होने की संभावना व्यक्त की गई है। परंपरागत मान्यताओं के अनुसार, आद्रा नक्षत्र के प्रारंभिक तीन-चार दिनों तक धरती को 'रजस्वला' अवस्था में माना जाता है, इसलिए किसान इस अवधि के बाद ही खेतों की जुताई शुरू करते हैं। कोच-बकसड़ा गांव के किसान बांके बिहारी मिश्र ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी इस परंपरा का पालन किया जाता है। वहीं, कृषि विज्ञान केंद्र के प्रमुख डॉ. देवकरण ने बताया कि जिले में 26 और 27 जून को क्रमशः आठ और छह मिलीमीटर वर्षा होने की संभावना है। हालांकि इस दौरान तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर बने रहने का अनुमान है।

भीमसेनी निर्जला एकादशी व्रत: 
भीमसेनी निर्जला एकादशी व्रत गुरुवार को रखा जाएगा। आचार्यों के अनुसार, इस व्रत का फल वर्ष भर की सभी 24 एकादशियों के व्रत के बराबर माना गया है। एकादशी तिथि बुधवार रात्रि से प्रारंभ होकर गुरुवार रात 9:14 बजे तक रहेगी। श्रद्धालु गुरुवार को व्रत रखकर शुक्रवार को सूर्योदय के बाद सुविधा अनुसार पारण कर सकते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, महाभारत काल में पांडवों में बलशाली भीमसेन को अत्यधिक भूख लगती थी, जिसके कारण वे वर्ष भर की सभी एकादशियों का व्रत नहीं रख पाते थे। तब महर्षि वेदव्यास ने उन्हें ज्येष्ठ मास की निर्जला एकादशी का व्रत करने का परामर्श दिया था। इसी कारण यह व्रत 'भीमसेनी एकादशी' के नाम से भी प्रसिद्ध है। इस अवसर पर जल से भरा घड़ा, मौसमी फल, छाता, वस्त्र तथा अन्य उपयोगी सामग्री का दान विशेष पुण्यदायी माना गया है।

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