कौशल विकास और पर्यटन विभाग युवाओं के रोजगार के लिये समन्वयपूर्वक करें प्रबंध : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

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कौशल विकास और पर्यटन विभाग युवाओं के रोजगार के लिये समन्वयपूर्वक करें प्रबंध : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
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भोपाल 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश में रोजगार के क्षेत्र में सतत रूप से नवाचारों की आवश्यकता है। मध्यप्रदेश में धार्मिक, प्राकृतिक, पुराधरोहर से संबंधित पर्यटन क्षेत्र समृद्ध है। पर्यटकों को आवश्यक मार्गदर्शन के लिए गाइड की व्यवस्था को सशक्त बनाने और विभिन्न व्यंजनों का आनंद दिलवाने के लिए कार्य की व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं। युवाओं को बड़ी संख्या में इन कार्यों से रोजगार मिलेगा। कौशल विकास और रोजगार विभाग का पर्यटन विभाग से तालमेल स्थापित कर यह कार्य संभव है। इसी तरह के रोजगारपरक कार्य दिलवाने के लिए विभिन्न विभाग नवाचार कर सकते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंगलवार को मंत्रालय में कौशल विकास और रोजगार विभाग की गतिविधियों की बैठक में समीक्षा की। बैठक में कौशल विकास और रोजगार राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार)  गौतम टेटवाल,मुख्य सचिव  अनुराग जैन, मुख्यमंत्री कार्यालय में अपर मुख्य सचिव  नीरज मंडलोई, तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास और रोजगार विभाग के प्रमुख सचिव  मनीष सिंह और विभागीय अधिकारी उपिस्थत थे।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में फैक्ट्री परिसर में भी प्रशिक्षण संस्था संचालित की जा सकती है। उद्योगों की जरूरत को देखते हुए आवश्यक ट्रेड में प्रशिक्षण के प्रबंध किए जाएं। कौशल विकास और रोजगार दिलवाने के विभिन्न विभागों के कार्यों का समग्र प्रतिवेदन भी तैयार किया जाए। विभिन्न विभाग संचालित योजनाओं से दी जा रही सेवाओं और सृजित नए रोजगारों का विवरण भी संकलित करें ताकि इस क्षेत्र की उपलब्धि एक नजर में दर्शाई जा सके। शासकीय और निजी क्षेत्र द्वारा उपलब्ध करवाए जा रहे रोजगार, राज्य की ही उपलब्धि है।

विभाग के प्रमुख नवाचार

बैठक में विभाग स्तर पर किए गए विभिन्न नवाचारों की जानकारी दी गई। परम फाउंडेशन के अंतर्गत 10 आईटीआई का संचालन एक विशेष नवाचार है। प्रतिमाह युवा संगम के आयोजन, महिला ड्राइविंग प्रशिक्षण, प्रतिभा सम्मान, वर्ष 2025 से आईटीआई में 30 प्रतिशत के स्थान पर 35 प्रतिशत सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित करने, विद्यार्थियों को विदेशी भाषा प्रशिक्षण और इसके माध्यम से रोजगार की संभावना बढ़ाने का कार्य किया गया है। इसके अलावा मानव संसाधन सुदृढ़ीकरण के अंतर्गत तकनीकी और अंतर्राष्ट्रीय प्रशिक्षण का लाभ युवाओं को दिलवाया गया है।

कौशल विकास क्षेत्र की प्रमुख उपलब्धियां

बैठक में विभागीय उपलब्धियों की जानकारी भी दी गई। इनमें वर्ष 2025 में 490 दिव्यांग प्रशिक्षणार्थियों को संस्थाओं में प्रवेश, गत 2 वर्ष में प्लेसमेंट ड्राइव के माध्यम से 18 हजार 403 प्रशिक्षणार्थियों को रोजगार, वर्ष 2025 में आईटीआई चलो अभियान में अब तक के सर्वाधिक 49 हजार 402 प्रवेश, यूएन वूमेन के सहयोग से 12 जनजातीय बहुल जिलों की 2127 महिलाओं को प्रशिक्षण, प्रदेश के तीन प्रशिक्षण अधिकारियों को राष्ट्रीय शिक्षक अवार्ड, युवा संगम से सवा तीन लाख आवेदकों को लाभ, संत शिरोमणि रविदास ग्लोबल स्किल पार्क में वर्ष 2024 से रोबोटिक्स, मेक्ट्रोनिक्स ऑटोमोबाइल जैसे 9 आधुनिक लाँगटर्म कोर्स का संचालन, 10 संभागीय आईटीआई के लिए हब इंस्टीट्यूट के रूप में व्यवस्थाएं कर ऑन-द-ऑब ट्रेनिंग और प्लेसमेंट सहायता दिलवाई जा रही है। वर्ष 2025 में आई टी आई में 3484 सीटों की वृद्धि की गई। वर्ष 2026 में 2356 सीटों की वृद्धि हुई। इस तरह दो वर्ष में 5840 सीट्स बढ़ी हैं। आईटीआई के विभिन्न ट्रेड में इस वर्ष 10 प्रशिक्षणार्थियों ने राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा में सर्वाधिक अंक प्राप्त किए। इसके अतिरिक्त कौशल विकास और रोजगार विभाग युवाओं को अंतर्राष्ट्रीय स्पर्धाओं में भागीदारी का अवसर दिलवा रहा है। इस क्रम में वर्ष 2024 में फ्रांस में हुई अंतर्राष्ट्रीय वर्ल्ड स्किल स्पर्धा में मध्यप्रदेश के संस्कार शर्मा ने सायबर सिक्योरिटी स्किल में मेडालियम ऑफ एक्सीलेंस हासिल किया। क्षेत्रीय स्पर्धा में 44 पदक और राष्ट्रीय स्पर्धा में 8 पदक प्राप्त करने की उपलब्धि भी मध्यप्रदेश को मिली है। ग्लोबल पार्क, भोपाल में वर्ष 2026-27 में 3 हजार सर्टिफिकेशन का लक्ष्य तय किया गया है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव के प्रमुख निर्देश

  •              प्रदेश में कौशल विकास की गतिविधियां निरंतर संचालित हों।
  •              औद्योगिक संस्थानों की आवश्यकता के अनुरूप कोर्स डिजाइन कर युवाओं को प्रशिक्षित किया जाए।
  •              खान-पान तैयार करने (पाक कला प्रशिक्षण) और गाइड के प्रशिक्षण को भी प्राथमिकता दी जाए।
  •              कोसा वस्त्रों के निर्माण के लिए प्रदेश में अधोसंरचना उपलब्ध है। युवाओं को उद्यानिकी विभाग के सहयोग से शहतूत उत्पादन जैसे कार्यों से जोड़ा जाए। रेशम उत्पादन की संभावनाओं पर भी कार्य किया जाए।

 गुना जिले में जैकेट बनाने का कार्य एक आदर्श मॉडल है। आर्थिक लाभ दिलवाने वाली अनेक गतिविधियां घर से ही संचालित की जा सकती हैं। लघु और कुटीर उद्योगों से युवाओं को जोड़ने के ठोस प्रयास किए जाएं।

 

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