योगी सरकार प्लाईवुड उद्योग के लिए नई एग्रोफॉरेस्ट्री नीति पर कर रही विचार

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योगी सरकार प्लाईवुड उद्योग के लिए नई एग्रोफॉरेस्ट्री नीति पर कर रही विचार

प्लाईवुड उद्योग के लिए उत्तर प्रदेश ने खोले विकास के नए द्वार

देशभर से आए लगभग 100 प्लाईवुड उद्योग प्रतिनिधियों ने लखनऊ और हरदोई में निवेश संभावनाओं को तलाशा 

ईज ऑफ डूइंग बिजनेस सुधार, 36 से अधिक सेक्टोरल नीतियां और आकर्षक प्रोत्साहन निवेशकों को दे रहे नई गति : दीपक कुमार

लखनऊ
 योगी सरकार उद्योग-अनुकूल नीतियों, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस सुधारों, विश्वस्तरीय आधारभूत संरचना और निवेशकों के लिए अनुकूल पारिस्थितिकी तंत्र के साथ देश के सबसे आकर्षक निवेश गंतव्यों में अपनी स्थिति लगातार मजबूत कर रही है। इसी क्रम में सोमवार को लखनऊ स्थित इन्वेस्ट यूपी कार्यालय में पश्चिम बंगाल, हरियाणा, दिल्ली, कर्नाटक और पंजाब सहित विभिन्न राज्यों से आए लगभग 100 प्लाईवुड उद्योग प्रतिनिधियों एवं संभावित निवेशकों के साथ उच्चस्तरीय निवेश संवाद आयोजित किया गया। इसमें उठाए गए सभी सुझावों और मुद्दों को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समक्ष रखा जाएगा ताकि उन पर शीघ्र अमल हो। 

बैठक में उत्तर प्रदेश की औद्योगिक क्षमताओं, निवेश के लिए तैयार आधारभूत संरचना, सरल अनुमोदन प्रक्रियाओं तथा प्लाईवुड एवं संबद्ध उद्योगों में उपलब्ध निवेश अवसरों पर विस्तार से चर्चा हुई। वरिष्ठ अधिकारियों ने उद्योग प्रतिनिधियों के साथ सीधे संवाद कर उद्योग वृद्धि के लिए राज्य सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई।

इस अवसर पर उत्तर प्रदेश सरकार के अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त दीपक कुमार ने कहा कि राज्य सरकार प्लाईवुड एवं एग्रोफॉरेस्ट्री उद्योग के लिए प्रतिस्पर्धी और भविष्य उन्मुख पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहाकि उत्तर प्रदेश इस क्षेत्र के लिए एक समर्पित नीति तैयार करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ेगा। हम पड़ोसी राज्यों की नीतियों का भी अध्ययन करेंगे ताकि प्लाईवुड और एग्रोफॉरेस्ट्री उद्योग के लिए अधिक प्रतिस्पर्धी एवं उद्योग-अनुकूल ढांचा विकसित किया जा सके।

उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र के लिए गठित की जाने वाली समिति में उद्योग जगत के प्रतिनिधियों को भी शामिल किया जाएगा, जिससे नीतिगत निर्णय व्यावहारिक अनुभवों और उद्योग की आवश्यकताओं के अनुरूप लिए जा सकें।

इन्वेस्ट यूपी के मुख्य कार्यपालक अधिकारी विजय किरन आनंद ने कहा कि उत्तर प्रदेश निरंतर सुधारों, सक्रिय निवेश सुविधा तंत्र और मजबूत औद्योगिक आधार के कारण देश के सबसे प्रतिस्पर्धी निवेश स्थलों में उभरकर सामने आया है। उन्होंने कहा कि राज्य की 36 से अधिक सेक्टोरल नीतियां, पूंजीगत सब्सिडी, भूमि आधारित प्रोत्साहन और रोजगार सहायता योजनाएं निवेशकों को विनिर्माण क्षेत्र में विस्तार के लिए व्यापक और भविष्य उन्मुख अवसर प्रदान कर रही हैं।उन्होंने बताया कि राज्य शीघ्र ही उपलब्ध भूमि बैंक से चार से पांच औद्योगिक क्लस्टरों की पहचान कर उन्हें क्लस्टर आधारित विकास के लिए आरक्षित करेगा। साथ ही यदि निवेशकों को भूमि बैंक से अतिरिक्त भूमि की आवश्यकता होगी तो राज्य सरकार भूमि उपलब्ध कराने और छह माह के भीतर उसका आवंटन सुनिश्चित करने का प्रयास करेगी।

प्लाईवुड फेडरेशन के प्रतिनिधियों ने इस उद्योग को कृषि, विनिर्माण और ग्रामीण आजीविका से जुड़ा बहुआयामी क्षेत्र बताते हुए ओडीओपी की तर्ज पर “वन इंडस्ट्रियल पार्क” मॉडल विकसित करने का सुझाव दिया। उन्होंने एग्रोफॉरेस्ट्री आधारित उद्योगों के लाइसेंस, वन नियमों, प्रदूषण मानकों, दंडात्मक प्रावधानों और एनओसी से जुड़ी चुनौतियों को भी रेखांकित किया तथा एग्रो आधारित उद्योगों के लिए पृथक नीति बनाने का प्रस्ताव रखा। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए दीपक कुमार ने कहा, “उद्योग जगत द्वारा उठाए गए सभी सुझावों और मुद्दों को हम गंभीरता से आगे बढ़ाएंगे तथा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समक्ष रखकर उद्योग-अनुकूल और व्यावहारिक समाधान तलाशेंगे।”

बैठक में इन्वेस्ट यूपी की अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी श्रीमती प्रेरणा शर्मा सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने भी भाग लिया। कार्यक्रम के अंतर्गत निवेशक प्रतिनिधिमंडल 23 जून को हरदोई जिले के संडीला क्षेत्र का दौरा करेगा, जहां वे भूमि उपलब्धता, आधारभूत संरचना और औद्योगिक विकास की संभावनाओं का आकलन करेंगे। इस पहल से नए निवेश आकर्षित होने, रोजगार सृजन बढ़ने और उत्तर प्रदेश के विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।

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