बिहार में स्कूलों के लिए तय हुई शिक्षकों की न्यूनतम संख्या, आदेश जारी

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पटना
बिहार की सम्राट चौधरी सरकार ने राज्य के स्कूलों में टीचरों की न्यूनतम संख्या तय कर दी है। शिक्षा विभाग की तरफ से कहा गया है कि पहली से पांचवीं तक के क्लास में 60 छात्रों पर 2 शिक्षकों का होना जरूरी है तो वहीं 61 से 90 छात्रों पर 3 टीचरों का स्कूल में होना अनिवार्य है। बिहार के सरकारी प्रारंभिक विद्यालयों में शिक्षकों की न्यूनतम संख्या कर दी गई है। वास्तविक नामांकन, कक्षा संरचना और विषयगत आवश्यकता के आधार पर इनकी संख्या तय की जाएगी। इस संबंध में प्राथमिक शिक्षा निदेशालय ने दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं।

शिक्षा विभाग के अनुसार समीक्षा में पाया गया है कि राज्य के अनेक विद्यालयों में निर्धारित मानक के अनुरूप शिक्षक उपलब्ध नहीं है। कुछ विद्यालयों में शिक्षकों की संख्या आवश्यकता से अधिक है। ऐसे में पूरे राज्य में शिक्षकों के युक्तिकरण और संतुलित वितरण के लिए नया मानक तैयार किया गया है। आदेश में अहम प्रवाधान किए गए हैं कि पहली से आठवीं तक संचालित विद्यालयों में शिक्षक आवश्यकता निर्धारण के लिए कक्षा 1-5 और कक्षा 6-8 को अलग-अलग शैक्षणिक इकाई माना जाएगा। हालांकि, विद्यालय में एक ही प्रधानाध्यापक होंगे।

छठी से आठवीं तक
छठी से आठवीं तक के लिए प्रत्येक विद्यालय में कम से कम एक-एक शिक्षक विज्ञापन एवं गणित, सामाजिक अध्ययन और भाषा (सामान्यत: हिंदी) में होंगे। 105 से 140 छात्रों के बीच नामांकन होने पर चौथ शिक्षक अंग्रेजी विषय का होगा। जबकि 140 से 175 छात्रों के बीच नामांकन होने पर पांचवां शिक्षक संस्कृत या उर्दू का होगा। इसी तरह 175 से अधिक छात्रों पर आवश्यकता के अनुसार अतिरिक्त शिक्षक दिए जाएंगे।

पहली से पांचवी तक के छात्र और शिक्षकों की संख्या कुछ इस तरह निर्धारित की गई है।

61 से 90 – 2

91 से 120 – 4

121 से 150 – 5

150 से अधिक – 5 शिक्षक, 1 प्रधान

150 से अधिक छात्रों वाले विद्यालयों में शिक्षक-छात्र अनुपात 1:30 से अधिक नहीं होगा।

शिक्षा विभाग के छह अफसरों पर वित्तीय गड़बड़ियों में गाज
वित्तीय अनियमितता और लापरवाही के आरोप में शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने सोमवार को छह अधिकारियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई का आदेश दिया है। अधिकारियों में से कुछ की वेतन-पेंशन से कटौती और वेतन वृद्धि पर रोक की भी अनुशंसा की गई है। यह आदेश 8 मई 2026 से प्रभावी होगा। शिक्षा मंत्री ने बताया कि बांका के पूर्व जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ) पवन कुमार पर लापरवाही का आरोप है। वे अभी पूर्वी चंपारण के जिला कार्यक्रम पदाधिकारी हैं। भोजपुर के पूर्व जिला कार्यक्रम पदाधिकारी मो. इरशाद अंसारी को वित्तीय अनियमितता में बर्खास्त करने की अनुशंसा की गई है।

बिहार संस्कृत शिक्षा बोर्ड के पूर्व सचिव राजेश कुमार पर लापरवाही का आरोप है। शिक्षकों की नियुक्ति में गड़बड़ी में सुपौल के पूर्व डीईओ रामाशीष महतो पर कार्रवाई की गई है। बांका के पूर्व डीईओ रह चुके देवेन्द्र कुमार झा पर भी वित्तीय अनियमितता के आरोप हैं। मधुबनी के मधेपुर की प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी मरजीना खातून को विद्यालय परित्याग प्रमाणपत्र पर प्रतिहस्ताक्षर के लिए अवैध राशि लेने के आरोप हैं।

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