विश्व योग एवं संगीत दिवस: सुर-ताल और कला के त्रिवेणी संगम से महकेगा मध्यप्रदेश, 14 स्थानों पर होंगे भव्य आयोजन

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भोपाल 

मध्यप्रदेश शासन के संस्कृति विभाग द्वारा आगामी 21 जून 2026 को 'विश्व योग एवं संगीत दिवस' के पावन अवसर पर प्रदेश में कला और संस्कृति का अनूठा उत्सव मनाया जा रहा है। इस विशेष दिवस पर राज्य के 14 स्थानों पर संगीत, नृत्य, चित्र और शिल्पकला पर केंद्रित भव्य सांस्कृतिक आयोजनों की श्रृंखला आयोजित की जाएगी। इन कार्यक्रमों में मध्यप्रदेश सहित देश के सुप्रतिष्ठित और ख्यातिलब्ध कलाकार अपनी कला का प्रदर्शन करेंगे, जो कला प्रेमियों के लिए एक अनूठा और अविस्मरणीय अनुभव होगा।

संस्कृति विभाग के संचालक  एन.पी. नामदेव ने जानकारी दी कि भारतीय शास्त्रीय संगीत हमारी प्राचीन और समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर का एक अटूट हिस्सा है। यह मात्र सुरों और रागों का मेल नहीं, बल्कि आत्मा को परमात्मा से जोड़ने वाली साधना और असीम मानसिक शांति का माध्यम है। उन्होंने कहा कि इस सुदीर्घ परंपरा का उत्सव मनाना गर्व की बात है, और इसका मुख्य उद्देश्य हमारी नई पीढ़ी को अपनी जड़ों, संस्कृति और कलात्मक धरोहर के प्रति जागरूक व गौरवान्वित करना है।

इसी कड़ी में, 21 जून को जनजातीय संग्रहालय' में संगीत और नृत्य समारोह का आयोजन किया जा रहा है। इस सुरमयी शाम की शुरुआत सु प्रदक्षिणा भट्ट (भोपाल) के शास्त्रीय गायन से होगी, जिसके बाद पुणे की सुप्रसिद्ध नृत्यांगना सु स्मिता महाजन अपने भावपूर्ण भरतनाट्यम नृत्य की प्रस्तुति देंगी। यह गरिमामयी कार्यक्रम सायंकाल 7:00 बजे से प्रारंभ होगा, जिसमें आम जनता और कला अनुरागियों के लिए प्रवेश पूरी तरह से निःशुल्क रखा गया है।

इसके साथ ही, प्रदेश के विभिन्न शासकीय संगीत महाविद्यालयों में भी सुर और ताल की महफिलें सजेंगी। शासकीय संगीत महाविद्यालय, नरसिंहगढ़ में  आकाश गुंटीवार का शास्त्रीय गायन और सु मोहिका सक्सेना का भरतनाट्यम होगा। उज्जैन में  यश देवले के शास्त्रीय गायन के बाद सुप्रसिद्ध नृत्यांगना सु सुचित्रा हरमलकर का कथक नृत्य दर्शकों को मंत्रमुग्ध करेगा। ग्वालियर में सु श्वेता गुंजन जोशी का गायन व सु सन्नाली शर्मा का कथक, खंडवा में  सुप्रियो मैत्रो व  आकाश तिवारी का गायन तथा सु प्रियंवदा सिंह का कथक नृत्य की प्रस्तुति दी जाएगी। मंदसौर में डॉ. नीलिमा छापेकर के गायन के साथ  मुन्ने खाँ और आबिद हुसैन का जुगलबंदी भरा सारंगी वादन होगा। वहीं, मैहर में  विजय सप्रे के गायन व सु शालिनी खरे के कथक और इंदौर में  दामोदर राव के गायन व सु भार्गवी शर्मा एवं समूह के कथक नृत्य की मनोहारी प्रस्तुतियां होंगी।

संगीत के साथ-साथ दृश्य कलाओं के संवर्धन के लिए प्रदेश के शासकीय ललित कला महाविद्यालयों में विशेष व्याख्यान और प्रदर्शन (डेमोंस्ट्रेशन) आयोजित किए जा रहे हैं। ग्वालियर में  बसंत भार्गव और धार में सु निधि चोपड़ा चित्रकला की बारीकियों को साझा करेंगे। इंदौर में गुजरात के प्रसिद्ध कलाकार  जयंती राबड़िया चित्रकला पर अपने अनुभव साझा करेंगे। वहीं, मूर्तिकला और शिल्पकला को बढ़ावा देने के लिए जबलपुर में वाराणसी के  मदनलाल शिल्पकला पर और खंडवा में सु गिरिजा वायंगणकर मूर्तिकला विषय पर व्याख्यान और जीवंत प्रदर्शन प्रस्तुत करेंगी। संस्कृति विभाग का यह प्रयास निश्चित रूप से प्रदेश में कलात्मक चेतना को एक नई ऊर्जा प्रदान करेगा।

 

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