‘भारत को रोकने के लिए रचे जा रहे झूठे नैरेटिव’— मोहन भागवत का बड़ा बयान, देश-विदेश की ताकतों पर साधा निशाना

Editor
4 Min Read
‘भारत को रोकने के लिए रचे जा रहे झूठे नैरेटिव’— मोहन भागवत का बड़ा बयान, देश-विदेश की ताकतों पर साधा निशाना
WhatsApp Share on WhatsApp
add_action('wp_footer', 'jazzbaat_new_version_modal'); function jazzbaat_new_version_modal() { ?>
SW24news • Beta

 नई दिल्ली
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने दावा किया है कि लोगों को गुमराह करने के लिए गलत रिपोर्टें फैलाई जा रही हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि भारत की बढ़ती ताकत और उत्थान को कमजोर करने के लिए देश के भीतर और बाहर, दोनों जगहों से झूठे नैरेटिव गढ़े जा रहे हैं। 

महाराणा प्रताप जयंती के मौके पर आयोजित एक कार्यक्रम में भागवत ने कहा, 'आज कुछ लोग ये तय करने में जुटे हैं कि भारत का उत्थान न हो. इसके लिए झूठे नैरेटिव बनाए जा रहे हैं, गलत खबरें फैलाई जा रही हैं और लोगों को भटकाने के लिए कई तरह के हथकंडे अपनाए जा रहे हैं। भागवत ने किसी का नाम लिए बिना कहा कि ऐसा करने वालों के पास जनसंख्या, सत्ता, पैसा और संगठनात्मक क्षमता जैसी बड़ी ताकतें हैं. इसके बावजूद, लोगों को अपने मूल्यों के आधार पर मजबूती से खड़े रहना होगा। 

आरएसएस प्रमुख ने जोर देकर कहा कि भारत का आगे बढ़ना सिर्फ उसके अपने लिए नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के कल्याण के लिए जरूरी है. उन्होंने कहा, 'दुनिया के लिए भी एक मजबूत भारत का होना बेहद जरूरी है। 

'हमारा इतिहास गुलामी का नहीं, संघर्ष का है'
हल्दीघाटी के ऐतिहासिक युद्ध की विरासत और महाराणा प्रताप को याद करते हुए मोहन भागवत ने कहा कि हमारा इतिहास गुलामी का नहीं है. ये उन लोगों के खिलाफ संघर्ष का इतिहास है, जिन्होंने हमें गुलाम बनाने की कोशिश की. महाराणा प्रताप का संघर्ष 'धर्म, संस्कृति और स्वाभिमान' की रक्षा के लिए था। भागवत ने आगे कहा, 'महाराणा प्रताप किसी व्यक्तिगत लाभ के लिए नहीं लड़े. वो समाज, संस्कृति और अपनी मातृभूमि की आजादी के लिए अत्याचार के खिलाफ लड़ रहे थे। 

उन्होंने कहा कि आज की चुनौतियों से निपटने के लिए हमें इतिहास के ऐसे नायकों से सीख लेनी चाहिए, जो विषम परिस्थितियों में भी अडिग रहे. भारत की असली ताकत सिर्फ संख्या या भौतिक संसाधनों में नहीं, बल्कि उसके सांस्कृतिक मूल्यों में है। 

विविधता के बीच एकता की अपील
मोहन भागवत ने लोगों से एकजुट रहने की अपील की. उन्होंने कहा कि जैसे मेवाड़ के लोग महाराणा प्रताप के साथ खड़े थे, वैसे ही हमें भारत की प्रगति के लिए मिलकर काम करना होगा. अलग-अलग पहचानें होना स्वाभाविक है, लेकिन एकता के लिए समानता जरूरी नहीं है. एकता के लिए आपसी सद्भाव और सम्मान जरूरी है। 

हल्दीघाटी के युद्ध को भागवत ने विदेशी आक्रमण के खिलाफ भारतीय समाज के लंबे संघर्ष का प्रतीक बताया. उन्होंने कहा कि खुद मुगल इतिहासकारों के रिकॉर्ड भी बताते हैं कि ये युद्ध कितना भीषण था और पहले हमले के बाद उन्हें कई मील पीछे हटना पड़ा था। 

भागवत के मुताबिक भारत ने कभी भी सामाजिक और सांस्कृतिक स्तर पर गुलामी स्वीकार नहीं की. अगर भारत को आगे बढ़ना है, तो भारतीयों को अपने चरित्र और मूल्यों को ऊंचा उठाना होगा। 

TAGGED: ,
Share This Article
Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *