चंडीगढ़ में अपराधियों पर सख्ती की तैयारी, शिमला बैठक में पड़ोसी राज्यों से मांगा जाएगा सहयोग

Editor
3 Min Read
चंडीगढ़ में अपराधियों पर सख्ती की तैयारी, शिमला बैठक में पड़ोसी राज्यों से मांगा जाएगा सहयोग
WhatsApp Share on WhatsApp
add_action('wp_footer', 'jazzbaat_new_version_modal'); function jazzbaat_new_version_modal() { ?>
SW24news • Beta

चंडीगढ़.

चंडीगढ़ में हाल के दिनों में बढ़ी आपराधिक घटनाओं के मद्देनजर प्रशासन 19 जून को शिमला में होने वाली उत्तरी क्षेत्रीय परिषद (एनजेडसी) की स्थायी समिति की 22वीं बैठक में कानून-व्यवस्था का मुद्दा प्रमुखता से उठाएगा।

इसके अलावा बुनियादी ढांचा विकास, ट्रैफिक प्रबंधन और सुखना वन्यजीव अभयारण्य के आसपास इको-सेंसिटिव जोन (ईएसजेड) घोषित करने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर भी चर्चा की जाएगी। प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, शहर में अपराध करने के बाद कई आरोपित गिरफ्तारी से बचने के लिए पड़ोसी राज्यों में फरार हो जाते हैं। ऐसे मामलों में अपराधियों की तलाश और सूचनाओं के आदान-प्रदान के लिए समिति के सदस्य राज्यों के बीच बेहतर समन्वय की मांग की जाएगी। शहर में बढ़ते ट्रैफिक दबाव को कम करने के लिए चंडीगढ़ प्रशासन रिंग रोड परियोजना को शीघ्र पूरा करने का मुद्दा भी बैठक में उठाएगा। इससे अन्य राज्यों से आने वाले वाहनों को शहर में प्रवेश किए बिना बाहरी मार्ग से ही आगे भेजा जा सकेगा।

मोहाली स्थित अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे तक कम दूरी वाले मार्ग का मुद्दा भी चर्चा का हिस्सा बन सकता है। बैठक में सुखना वन्यजीव सेंचरी के आसपास ईको-सेंसिटिव जोन घोषित करने का मामला भी उठाया जाएगा। चंडीगढ़ प्रशासन लंबे समय से पंजाब सरकार से इस दिशा में कार्रवाई की मांग करता रहा है। पंजाब ने अभयारण्य की सीमा से 2 से 2.75 किलोमीटर तक के क्षेत्र को संवेदनशील क्षेत्र घोषित करने का प्रस्ताव रखा था, जबकि पहले केवल 100 मीटर क्षेत्र को ईएसजेड घोषित करने का प्रस्ताव प्रशासन ने अस्वीकार कर दिया था।

दूसरी ओर, हरियाणा सरकार ने अपने क्षेत्र में 1 से 1.5 किलोमीटर तक के क्षेत्र को ईएसजेड घोषित करने की मंशा जताई है। बैठक में चार राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों सहित कई वरिष्ठ अधिकारी भाग लेंगे। उत्तरी क्षेत्रीय परिषद में हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, पंजाब, राजस्थान, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली तथा चंडीगढ़ शामिल हैं। स्थायी समिति की बैठक का उद्देश्य मुख्य परिषद बैठक के लिए एजेंडा तैयार करना है।

गौरतलब है कि वर्ष 2017 में केंद्र सरकार ने केवल चंडीगढ़ क्षेत्र के लिए ईको-सेंसिटिव जोन अधिसूचित किया था। चंडीगढ़ प्रशासन लगातार यह मांग करता रहा है कि सुखना वन्यजीव अभयारण्य के संरक्षण के लिए पंजाब और हरियाणा के हिस्सों को भी ईएसजेड के दायरे में लाया जाए। प्रशासन का मानना है कि इससे झील और अभयारण्य के आसपास अनियंत्रित व्यावसायिक निर्माण पर रोक लगेगी और पर्यावरण संरक्षण को मजबूती मिलेगी।

Share This Article
Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *