आंगनवाड़ी दीदी के प्रयास से कुपोषण के चक्रव्यूह से बाहर आई मासूम माहिका

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आंगनवाड़ी दीदी के प्रयास से कुपोषण के चक्रव्यूह से बाहर आई मासूम माहिका
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भोपाल 

जब सरकारी प्रयास और एक माँ का संकल्प आपस में मिलते हैं, तो कुपोषण जैसी गंभीर चुनौती को भी मात दी जा सकती है। महिला एवं बाल विकास विभाग के जमीनी प्रयासों और 'पोषण पखवाड़ा' अभियान की सफलता की एक बेहद भावुक और प्रेरक कहानी ग्वालियर जिले से सामने आई है। यहाँ के शहरी परियोजना-01 के अंतर्गत आने वाले पीएचई कॉलोनी (सेक्टर 3, वार्ड 7) आंगनबाड़ी केंद्र की सजगता से 'सैम' (SAM – Severe Acute Malnutrition) यानी गंभीर कुपोषण की शिकार एक मासूम बच्ची अब पूरी तरह स्वस्थ और सामान्य श्रेणी में आ चुकी है। इस सफलता ने न केवल एक परिवार को खुशियाँ लौटाई हैं, बल्कि पूरे प्रदेश के लिए कुपोषण के खिलाफ जंग में एक अनूठा उदाहरण पेश किया है।

ग्वालियर की पीएचई कॉलोनी में रहने वाली  मोना के घर 14 मार्च 2025 को बेटी माहिका का जन्म हुआ था। जन्म के कुछ महीनों बाद ही माहिका का स्वास्थ्य बिगड़ने लगा और वह शारीरिक रूप से कमजोर होने लगी। जनवरी 2026 में जब आंगनबाड़ी केंद्र पर उसका वजन और लंबाई मापी गई, तो आंकड़े बेहद चिंताजनक थे। महज 5 किलो 500 ग्राम वजन और 68 सेंटीमीटर लंबाई के साथ माहिका 'सैम' (गंभीर कुपोषण) की श्रेणी में जा चुकी थी। एक माँ के लिए अपनी संतान को इस हालत में देखना किसी सदमे से कम नहीं था।

माहिका की इस गंभीर स्थिति को देखते हुए आंगनबाड़ी कार्यकर्ता  माधुरी राजावत ने तुरंत मोर्चा संभाला। उन्होंने 19 जनवरी 2026 को माहिका को विशेष 'C-SAM' कार्यक्रम के तहत पंजीकृत किया और उस पर विशेष ध्यान देना शुरू किया। इस पूरी मुहिम में बड़ा बदलाव तब आया जब अप्रैल माह में आयोजित 8वें पोषण पखवाड़े के दौरान परियोजना अधिकारी डॉ. मनोज गुप्ता और सेक्टर पर्यवेक्षक  सुमन पांडे ने खुद इस मामले में गहरी रुचि ली।

कार्यक्रम में आंगनबाड़ी टीम ने केंद्र पर आए हितग्राहियों को परामर्श देते हुए भोजन में मोटे अनाज, मौसमी सब्जियों, फलों और 'तिरंगा भोजन' के महत्व को समझाया। इसके साथ ही 6 माह से 2 वर्ष के बच्चों के लिए नियमित स्तनपान के साथ दिन में तीन से चार बार ऊपरी आहार देने की सलाह दी गई। इस आयोजन में माहिका की माँ मोना भी सम्मिलित हुईं और उन्होंने वहाँ दी गई हर सीख को गहराई से समझा।

विभागीय अधिकारियों और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता की टीम ने माहिका के घर जाकर गृहभेंट की और परिवार का हौसला बढ़ाया। आंगनबाड़ी केंद्र से मिली सीख को  मोना ने पूरी निष्ठा से अपने जीवन में लागू किया। उन्होंने आंगनबाड़ी से मिलने वाले टेक होम राशन (THR) का सही उपयोग कर अपनी बेटी के लिए नियमित रूप से पौष्टिक हलवा और खिचड़ी बनाना शुरू किया। पोषण के साथ माँ ने माहिका के मानसिक विकास पर भी ध्यान दिया, जिसके तहत उन्होंने बच्ची के साथ खेलना, उसे कविताएं सुनाना और स्वच्छता का विशेष ध्यान रखना प्रारंभ किया।

सघन प्रयास के बाद प्रत्येक सप्ताह माहिका की ग्रोथ मॉनिटरिंग की जाने लगी, जिसके सुखद परिणाम अब सामने आ चुके हैं। विभागीय अधिकारियों के मार्गदर्शन और माँ की अथक मेहनत से वर्तमान में माहिका का वजन और लंबाई दोनों ही पूरी तरह से सामान्य श्रेणी में आ चुके हैं। मासूम माहिका के स्वास्थ्य में आया यह क्रांतिकारी सुधार देखकर उसके माता-पिता और पूरे परिवार की खुशी का ठिकाना नहीं है। आंगनबाड़ी दीदी की इस ममतामयी पहल और विभाग की मुस्तैदी ने यह साबित कर दिया है कि सही पोषण, सही देखभाल और निरंतर निगरानी से हर आंगन को खुशहाल बनाया जा सकता है।

 

 

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