छत्तीसगढ़ उपभोक्ता आयोग का बड़ा फैसला: बीमा कंपनी की याचिका खारिज, राइस मिल को 43.30 लाख देने का आदेश

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 दुर्ग
 बीमा कंपनियों द्वारा वैध दावों के निपटारे में की जाने वाली मनमानी और कटौती पर राज्य उपभोक्ता आयोग ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। आयोग ने ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी की अपील को पूरी तरह से निराधार मानते हुए खारिज कर दिया है। इसके साथ ही, उपभोक्ता किशोर सारटेक्स एंड राइस मिल की काउंटर अपील को स्वीकार करते हुए बीमा कंपनी को 43 लाख 30 हजार 423 रुपये का भुगतान करने का आदेश जारी किया है। आयोग ने यह भी निर्देश दिया है कि इस राशि पर 11 मार्च 2024 से आठ प्रतिशत वार्षिक दर से ब्याज भी देय होगा।

बिना ठोस कानूनी आधार के कम किया दावा
प्रकरण के अनुसार, दुर्ग ब्लॉक के समोदा में स्थित किशोर सारटेक्स एंड राइस मिल ने अपनी मिल में स्थापित बूलर कंपनी की कलर सॉर्टर मशीन का बीमा ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी से कराया था। एक अक्टूबर 2023 को यह मशीन अचानक खराब हो गई, जिसकी सूचना मिल प्रबंधन ने तुरंत बीमा कंपनी को दी। कंपनी द्वारा नियुक्त सर्वेयर ने मौके का निरीक्षण किया, लेकिन इसके बाद बिना किसी ठोस कानूनी आधार के, उपभोक्ता के 45 लाख 58 हजार 340 रुपये के वास्तविक दावे को घटाकर मात्र 20 लाख 55 हजार रुपये कर दिया।

जिला आयोग ने ग्राहक के पक्ष मे सुनाया आदेश
बीमा कंपनी के निर्णय के खिलाफ राइस मिल के संचालक कृष्णा अग्रवाल ने अधिवक्ता कमल नयन चतुर्वेदी के माध्यम से जिला उपभोक्ता आयोग, दुर्ग में न्याय की गुहार लगाई। दोनों पक्षों को सुनने के बाद जिला आयोग ने 28 जुलाई 2025 को बीमा कंपनी को 40 लाख रुपये भुगतान करने का आदेश दिया था। आदेश को चुनौती देते हुए ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी ने राज्य उपभोक्ता आयोग में अपील दायर की। वहीं, पीड़ित उपभोक्ता ने भी काउंटर अपील दायर कर पूरे नुकसान की भरपाई की मांग की। राज्य आयोग ने मामले की विस्तृत समीक्षा के बाद माना कि कंपनी ने दावे को अनुचित तरीके से कम किया था और रिपेयर बिल के आधार पर पूरा भुगतान करने का फैसला सुनाया।

IRDAI से करेंगे शिकायत
उपभोक्ता की ओर से पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता कमल नयन चतुर्वेदी ने बताया कि यह फैसला उपभोक्ताओं के अधिकारों की बड़ी जीत है। उन्होंने कहा कि बीमा कंपनियों द्वारा वैध दावों को तकनीकी कमियों का बहाना बनाकर खारिज करने के बढ़ते मामलों को लेकर भारतीय बीमा विनियामक एवं विकास प्राधिकरण (IRDAI) और वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग (DFS) को भी औपचारिक शिकायत भेजी जाएगी ताकि भविष्य में ऐसी मनमानी पर रोक लग सके।

 

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