हिंदू ग्रोथ रेट’ से कांग्रेस ग्रोथ रेट तक… PM मोदी ने विकास की बहस में कांग्रेस को घेरा

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हिंदू ग्रोथ रेट’ से कांग्रेस ग्रोथ रेट तक… PM मोदी ने विकास की बहस में कांग्रेस को घेरा
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नई दिल्ली

एनडीए की मीटिंग में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस पर बड़ा हमला बोला. पीएम मोदी ने कहा कि जिस धीमी विकास दर को दशकों तक ‘हिंदू ग्रोथ रेट’ कहा गया, उसे वास्तव में ‘कांग्रेस ग्रोथ रेट’ कहा जाना चाहिए था, क्योंकि उस दौर की नीतियों, शासन शैली और आर्थिक फैसलों के लिए कांग्रेस जिम्मेदार थी, न कि देश की संस्कृति या बहुसंख्यक समाज. पीएम मोदी ने जो बातें कहीं हैं, वो कांग्रेस के ल‍िए मुसीबत के बीज की तरह हैं. क्‍योंक‍ि बीजेपी अब इस शब्‍द को लोगों के बीच ले जाएगी, उन्‍हें बताएगी क‍ि कांग्रेस राज में क‍िस तरह ह‍िन्‍दुओं के माथे पर कलंक मढ़ा गया। 

पीएम मोदी ने कहा, NDA के 12 वर्षों की एक बड़ी सफलता ये भी है कि देश कांग्रेस के कुचक्र से आजाद हुआ है. कांग्रेस ने देश को लाचारगी, बेचारगी और हीन भावना के गर्त में गिरा दिया था. देश को यही एहसास कराया जाता था कि भारत में विकास धीरे-धीरे ही होता है, भारत में तेज विकास संभव ही नहीं है और बड़ी ही चतुराई से धीमी विकास को एक नाम दिया था, ‘हिंदू ग्रोथ रेट’ यानी कार्यशैली कांग्रेस की, दायित्व कांग्रेस का, विफलता कांग्रेस की लेकिन कलंक देश की बड़ी हिंदू आबादी के नाम लगाया गया. जबकि असल में इस कुसंस्कृति का नाम होना चाहिए था कांग्रेस ग्रोथ रेट। 

‘कांग्रेस ग्रोथ रेट’ और ‘NDA ग्रोथ रेट’ का अंतर समझाया
पीएम मोदी ने कहा- सवाल ये है कि अगर 12 साल में इतना कुछ हो सकता है तो फिर दशकों तक क्यों नहीं हुआ? ये ‘कांग्रेस ग्रोथ रेट’ और ‘NDA ग्रोथ रेट’ का अंतर है. एक व्यवस्था लोगों को इंतजार कराती थी. आज की व्यवस्था परिणाम दिखाती है. एक व्यवस्था काम अटकाती-भटकाती थी. आज की व्यवस्था कहती है, काम अभी होगा, समय पर होगा और बड़े पैमाने पर होगा. इसलिए 2014 से 2026 की कहानी केवल आंकड़ों की कहानी नहीं है, ये उस भारत की कहानी है, जिसने पहली बार अपनी पूरी क्षमता के साथ दौड़ना तय किया है। 

कहां से आया ये शब्‍द
‘हिंदू ग्रोथ रेट’ शब्द मुख्य रूप से 1950 से 1980 के दशक के बीच भारत की औसत आर्थिक विकास दर के लिए इस्तेमाल किया गया था. उस दौर में भारत की जीडीपी वृद्धि दर करीब 3 से 3.5 प्रतिशत के आसपास रहती थी. जबकि आबादी तेजी से बढ़ रही थी. नतीजा यह हुआ कि प्रति व्यक्ति आय में बहुत सीमित बढ़ोतरी हुई. कहते हैं क‍ि इस शब्द का इस्तेमाल सबसे पहले भारतीय अर्थशास्त्री राज कृष्‍णा ने किया था. उनका मकसद धीमी आर्थिक वृद्धि को व्यंग्यात्मक ढंग से बताना था. बाद में नेताओं ने इसका इस्‍तेमाल करना शुरू कर द‍िया, ज‍िसका ज‍िक्र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने क‍िया। 

पीएम मोदी ने इसे ‘कांग्रेस ग्रोथ रेट’ क्यों कहा?
प्रधानमंत्री मोदी का तर्क है कि धीमी विकास दर के लिए भारत की सभ्यता, संस्कृति या समाज को जिम्मेदार ठहराना गलत था. उनके मुताबिक उस समय देश में जिस तरह की आर्थिक नीतियां लागू थीं, वे कांग्रेस सरकारों द्वारा बनाई गई थीं. स्वतंत्रता के बाद लंबे समय तक भारत में लाइसेंस-परमिट राज, सरकारी नियंत्रण वाली अर्थव्यवस्था और सीमित निजी निवेश का मॉडल लागू रहा. उद्योग लगाने से लेकर उत्पादन बढ़ाने तक लगभग हर काम के लिए सरकारी अनुमति की जरूरत पड़ती थी. पीएम मोदी का कहना है कि विकास की धीमी गति की वजह यही नीतियां थीं. इसलिए उस दौर को हिंदू ग्रोथ रेट कहने के बजाय कांग्रेस ग्रोथ रेट कहना अधिक उचित होगा। 

अटल सरकार का जिक्र क्यों किया?
अपने भाषण में मोदी ने कहा कि देश ने पहली बार तेज विकास की झलक तब देखी जब अटल जी की सरकार आई. अटल सरकार के दौर में राष्ट्रीय राजमार्ग विकास परियोजना, ग्रामीण सड़क योजना, दूरसंचार क्षेत्र में सुधार और बुनियादी ढांचे पर बड़े निवेश जैसे कदम उठाए गए थे. बीजेपी लंबे समय से दावा करती रही है कि आर्थिक सुधारों को गति देने और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर की नींव मजबूत करने में अटल सरकार की बड़ी भूमिका रही. मोदी ने इसी संदर्भ में अटल सरकार को तेज विकास का शुरुआती मॉडल बताया। 

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