उत्तर प्रदेश बना पोषण सुधार में देश का अग्रणी राज्य, टेक होम राशन से 1.56 करोड़ लाभार्थी लाभान्वित

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 लखनऊ
 उत्तर प्रदेश अब देश में मातृ एवं शिशु पोषण में सुधार करने वाला सबसे अग्रणी राज्य बनकर उभरा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजनरी मार्गदर्शन में महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा संचालित 'टेक होम राशन' योजना ने राज्य से कुपोषण को जड़ से मिटाने की मुहिम को एक नई और वैज्ञानिक दिशा दी है। भारत सरकार की 'सक्षम आंगनवाड़ी एवं पोषण 2.0' गाइडलाइन को इतने बड़े पैमाने पर धरातल पर उतारने वाला उत्तर प्रदेश देश का पहला राज्य बन गया है। वर्तमान में इस पारदर्शी डिजिटल व्यवस्था के जरिए हर महीने रिकॉर्ड 1.56 करोड़ लाभार्थियों तक उच्च गुणवत्ता वाला पुष्टाहार सीधे पहुँच रहा है।

डिजिटल निगरानी से पारदर्शी हुई वितरण प्रणाली
योगी सरकार ने पुष्टाहार वितरण में होने वाले पुराने भ्रष्टाचार और लीकेज को रोकने के लिए पूरी सप्लाई चेन को आधुनिक तकनीक से लैस कर दिया है।

हाईटेक ट्रैकिंग: राशन के हर पैकेट की डिजिटल निगरानी के लिए जीपीएस (GPS) ट्रैकिंग और क्यूआर (QR) कोड प्रणाली लागू की गई है।

ओटीपी सत्यापन: आंगनवाड़ी केंद्रों से लाभार्थियों को पुष्टाहार सौंपते समय ओटीपी आधारित सत्यापन किया जाता है, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि राशन केवल सही हकदार तक ही पहुँचे।

दिखने लगा जमीनी असर
बाल विकास एवं पुष्टाहार तथा राज्य पोषण मिशन की निदेशक हर्षिता माथुर के अनुसार, सरकार की इस केंद्रित नीति के परिणाम अब राष्ट्रीय स्तर के स्वास्थ्य सर्वे में भी प्रमाणित हो रहे हैं।

स्टंटिंग में कमी: राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS) के आंकड़ों के मुताबिक, राज्य में बच्चों में स्टंटिंग (उम्र के हिसाब से कम लंबाई) की दर 39.7 प्रतिशत से भारी गिरावट के साथ 31.5 प्रतिशत पर आ गई है।

कुपोषण पर लगाम: बच्चों में अल्पवजन और दुबलेपन जैसी गंभीर समस्याओं में भी उल्लेखनीय और ऐतिहासिक सुधार दर्ज किया गया है।

आयु के अनुसार तैयार हो रहे विशेष 'पोषण उत्पाद'
इस योजना के तहत लाभार्थियों की शारीरिक जरूरत के हिसाब से अलग-अलग रेसिपी आधारित अनुपूरक पुष्टाहार तैयार किए जा रहे हैं।

बच्चों के लिए: शिशु अमृत, शिशु आहार, बाल पुष्टिकर, आरोग्य पोषण और बाल संजीवनी जैसे ऊर्जा से भरपूर उत्पाद।

माताओं के लिए: गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं के संतुलित स्वास्थ्य के लिए विशेष 'संपूर्ण मातृ आहार'।

महिला स्वयं सहायता समूहों को मिली उत्पादन की कमान
यह योजना केवल स्वास्थ्य सुधार तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था और महिला सशक्तिकरण की भी नई मिसाल बन चुकी है।

रोजगार की नई राह: टेक होम राशन के निर्माण और उसकी आपूर्ति की पूरी जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़े महिला स्वयं सहायता समूहों को दी गई है।

आर्थिक रूप से सशक्त: वर्तमान में प्रदेश की 4,000 से अधिक ग्रामीण महिलाएं सीधे तौर पर इन हाईटेक उत्पादन इकाइयों का संचालन कर आत्मनिर्भर बन रही हैं।

1.56 करोड़ लाभार्थियों को सुरक्षा कवच
इस योजना के तहत हर महीने छह माह से छह वर्ष तक के बच्चों, गर्भवती व धात्री महिलाओं और गंभीर रूप से अतिकुपोषित बच्चों समेत 1.56 करोड़ लोगों को कवर किया जा रहा है। तकनीक, सामाजिक समावेशन और पोषण के इस अनूठे समन्वय ने उत्तर प्रदेश को 'सक्षम और सुपोषित भारत' के संकल्प को सिद्ध करने वाला देश का सबसे सशक्त राज्य बना दिया है।

 

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