बिहार जाति गणना का डेटा अब किताब में: हर जाति की आय और संपत्ति का पूरा ब्यौरा होगा प्रकाशित

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बिहार जाति गणना का डेटा अब किताब में: हर जाति की आय और संपत्ति का पूरा ब्यौरा होगा प्रकाशित
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पटना
बिहार में जो जाति आधारित गणना और आर्थिक सर्वे हुआ था, उसके आंकड़ों को अब राज्य सरकार एक किताब की शक्ल देने जा रही है। सामान्य प्रशासन विभाग ने इसकी पूरी तैयारी शुरू कर दी है। इस किताब में बिहार की हर एक जाति की कमाई कितनी है और उनके पास कितनी जमीन-जायदाद या संपत्ति है, इसका पूरा लेखा-जोखा सिलसिलेवार ढंग से छापा जाएगा। सरकार का मानना है कि इस किताब के आने से समाज की हर जाति की असली आर्थिक स्थिति और उनके विकास का पूरा सच सबके सामने आ सकेगा। इस काम को जल्द से जल्द पूरा करने के लिए सरकार ने प्रकाशकों से हाथ मिलाने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है।

216 पन्नों की होगी यह स्पेशल किताब
इस सरकारी योजना के मुताबिक, छपने वाली इस किताब में करीब 216 पन्ने होंगे। पहले चरण में सरकार इसकी 500 कॉपियां छपवाने जा रही है। सरकार इस काम को लेकर कितनी जल्दी में है, इसका अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि जिस भी प्रकाशक को इसका टेंडर या ऑर्डर मिलेगा, उसे सिर्फ 2 दिनों के भीतर किताब छापकर सरकार को सौंपनी होगी। किताब छापने वाले पब्लिशर के लिए सरकार ने एक साल का इनकम टैक्स रिटर्न और जीएसटी रजिस्ट्रेशन होना बिल्कुल अनिवार्य कर दिया है।

नीति बनाने और रिसर्च करने में मिलेगी बड़ी मदद
आपको बता दें कि बिहार सरकार ने 2 अक्तूबर 2023 को जातीय गणना के मुख्य आंकड़े जारी किए थे। इसके अनुसार बिहार की कुल आबादी 13.07 करोड़ से ज़्यादा है, जिसमें 12.53 करोड़ लोग बिहार में रहते हैं और करीब 53.72 लाख लोग राज्य से बाहर रहते हैं। पूरे राज्य में कुल 2.83 करोड़ से ज़्यादा परिवारों का सर्वे हुआ था, जिसमें पिछड़ा वर्ग की आबादी 27.13 प्रतिशत आई थी। जानकारों का कहना है कि इस आर्थिक सर्वे की किताब के आने से आगे चलकर सरकार को गरीबों के लिए नई योजनाएं और नीतियां बनाने में बहुत आसानी होगी, साथ ही पढ़ाई और रिसर्च करने वालों को भी सटीक डेटा मिल सकेगा।

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