ऑटो ड्राइवर की बेटी ने रचा इतिहास, रोहतक की मीनाक्षी हुड्डा दूसरी बार बनीं दुनिया की नंबर-1 बॉक्सर

Editor
3 Min Read
ऑटो ड्राइवर की बेटी ने रचा इतिहास, रोहतक की मीनाक्षी हुड्डा दूसरी बार बनीं दुनिया की नंबर-1 बॉक्सर
WhatsApp Share on WhatsApp
add_action('wp_footer', 'jazzbaat_new_version_modal'); function jazzbaat_new_version_modal() { ?>
SW24news • Beta

रोहतक.

कहते हैं कि यदि इरादे मजबूत हों और लक्ष्य के प्रति समर्पण अटूट हो, तो कोई भी मंजिल दूर नहीं रहती। हरियाणा के छोटे से गांव रूड़की की बेटी मीनाक्षी हुड्डा ने अपनी मेहनत, लगन और संघर्ष के दम पर इस बात को सच साबित कर दिखाया है।
गांव रुड़की की बेटी मीनाक्षी हुड्डा ने आज विदेशी धरती पर गोल्डन पंच मारकर न सिर्फ अपने परिवार, बल्कि पूरे देश का नाम रोशन कर रही है।

कभी समाज और रिश्तेदारों के ताने सुनने वाली मीनाक्षी हुड्डा ने लगातार दूसरी बार विश्व की नंबर-1 बॉक्सर बनने का गौरव हासिल किया है। वर्ल्ड बाक्सिंग फेडरेशन द्वारा हाल ही में जारी रैंकिंग में 48 किलोग्राम भार वर्ग में मीनाक्षी को दुनिया की नंबर-1 खिलाड़ी घोषित किया गया है। इससे पहले भी मीनाक्षी विश्व रैंकिंग में नंबर-1 स्थान हासिल कर चुकी है और अब दोबारा उन्होंने यह मुकाम हासिल किया है।

बता दें कि मीनाक्षी हुड्डा ने पिछले एक वर्ष में लगातार चार अंतरराष्ट्रीय स्तरीय प्रतियोगिता में भाग लेकर शानदार प्रदर्शन किया है। जिसके आधार पर ही मीनाक्षी दुनिया की नबंर वन की खिलाड़ी बनी है। हाल ही में आयोजित एशियन बाक्सिंग चैंपियनशिप में उन्होंने गोल्ड मेडल। इसके अलावा ग्रेटर नोएडा में आयोजित विश्व मुक्केबाजी कप में गोल्ड मेडल अपने नाम किया, जबकि वर्ल्ड बाक्सिंग कप में सिल्वर मेडल हासिल किया। मीनाक्षी की सबसे बड़ी उपलब्धि इंग्लैंड में आयोजित वर्ल्ड बाक्सिंग चैंपियनशिप में देखने को मिली। प्रतियोगिता के फाइनल मुकाबले में उन्होंने कजाकिस्तान की अनुभवी मुक्केबाज और चार बार की विश्व चैंपियन व ओलिंपिक रजत पदक विजेता नाजिम काइजेबे को हराकर गोल्ड मेडल जीता था।

मीनाक्षी कई बार बन चुकी है नेशनल चैंपियन
साधारण परिवार से आने वाली मीनाक्षी के पिता कृष्ण हुड्डा आटो चालक व मां सुनीता गृहिणी है। सीमित संसाधनों के बावजूद परिवार ने बेटी के सपनों को उड़ान देने में कोई कसर नहीं छोड़ी। वर्ष 2013 में मीनाक्षी ने अपने गांव में कोच विजय हुड्डा के मार्गदर्शन में मुक्केबाजी की शुरुआत की थी। कठिन परिस्थितियों और सामाजिक चुनौतियों के बावजूद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। इससे पहले वह वर्ष 2023 और 2024 में लगातार दो बार राष्ट्रीय चैंपियन बनीं। इसके अलावा ऑल इंडिया यूनिवर्सिटी प्रतियोगिता में दो बार स्वर्ण पदक जीत चुकी है। खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स में भी उन्होंने गोल्ड मेडल हासिल किया। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वर्ष 2023 की एशियाई चैंपियनशिप में रजत पदक, इलरोडा कप और ब्रिक्स प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीता।

TAGGED:
Share This Article
Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *