8th Pay Commission पर बड़ा अपडेट, बढ़ी अहम डेडलाइन; कर्मचारियों की बढ़ीं उम्मीदें

Editor
4 Min Read
8th Pay Commission पर बड़ा अपडेट, बढ़ी अहम डेडलाइन; कर्मचारियों की बढ़ीं उम्मीदें
WhatsApp Share on WhatsApp
add_action('wp_footer', 'jazzbaat_new_version_modal'); function jazzbaat_new_version_modal() { ?>
SW24news • Beta

 नई दिल्‍ली
8वें वेतन आयोग (
CPC) के तहत एक बड़ा अपडेट सामने आया है. आयोग ने सुझाव और मांग रख्‍ने की डेडलाइन बढ़ाकर 15 जून तक कर दी है. इससे केंद्र सरकार के कर्मचारियों, पेंशनर्स और अन्‍य कर्मचारियों को सैलरी, पेंशन और अलाउंस में संशोधन पर विचार करने के लिए एक्‍स्‍ट्रा समय मिल गया है। 

यह विस्‍तार ऐसे समय में हुआ है, जब कर्मचारी यूनियनों और पॉलिसी मेकर्स के बीच लंबे समय से इंतजार किए जा रहे फिटमेंट फैक्‍टर पर चर्चा तेज हो गई है. नए नोटिफिकेशन में 8वें वेतन आयोग ने ऐलान किया है कि  हितधारकों द्वारा अपने ज्ञापन और सिफारिशें प्रस्तुत करने की अंतिम तिथि 15 जून होगी. इससे पहले आयोग द्वारा दी गई समय सीमा को 31 मई तक बढ़ा दिया गया था और यह दूसरी बार है जब समय सीमा बढा़ई गई है। 

आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि सुझाव केवल उसकी आधिकारिक वेबसाइट 8cpc.gov.in के माध्यम से ही स्वीकार किए जाएंगे. परामर्श प्रक्रिया के दौरान फिजिकल डॉक्‍यूमेंट्स, ईमेल, हार्ड कॉपी और पीडीएफ लेटर स्वीकार नहीं की जाएंगी. इस विस्तार का मतलब आयोग द्वारा अपनी सिफारिशों को अंतिम रूप देने से पहले कर्मचारी यूनियनों, पेंशनर्स ग्रुप, डिफेंस इम्‍प्‍लाई के प्रतिनिधियों और अन्य हितधारकों की व्यापक भागीदारी को प्रोत्साहित करना है। 

कौन-कौन कर सकता है सिफारिशें  
केंद्र सरकार के कर्मचारी, पेंशनर्स, रक्षाकर्मी, अखिल भारतीय सेवा अधिकारी, केंद्र शासित प्रदेश के कर्मचारी और सरकार द्वारा अधिसूचित अन्य पात्र अपनी मांग रख सकते हैं. इस पैनल से उम्‍मीद की जाती है कि वह अपने चयन के 18 महनों के भीतर अपनी रिपोर्ट पेश कर देगा. हालांकि, जरूरत पड़ने पर अंतरिम रिपोर्ट भी जारी की जा सकती है। 

फिटमेंट फैक्टर
आठवें वेतन आयोग के सबसे अधिक ध्यान से देखे जाने वाले पहलुओं में से एक है फिटमेंट फैक्टर, जो वेतन और पेंशन संशोधनों की लिमिट तय करता है. यह संशोधित बेसिक सैलरी और पेंशन के कैलकुलेशन में उपयोग किया जाने वाला एक फैक्‍टर है. हाई फिटमेंट फैक्‍टर से सैलरी और रिटायरमेंट प्रॉफिट में अधिक बढ़ोतरी होती है। 

उदाहरण के लिए 
छठा वेतन आयोग (2006): फिटमेंट फैक्‍टर 1.86,
सातवां वेतन आयोग (2016): फिटमेंट फैक्‍टर 2.57

सातवें वेतन आयोग के फार्मूले के तहत न्यूनतम बेसिक सैलरी ₹18,000 तय किया गया था. 2.57 के फिटमेंट फैक्टर को लागू करने से पिछले सैलरी स्‍ट्रक्‍चर की तुलना में वेतन में काफी बढ़ी हुई है। 

8वें वेतन आयोग के तहत क्‍या हैं मांगे? 
कई यूनियनों का तर्क है कि बढ़ती महंगाई, आवास की बढ़ती लागत, हेल्‍थ खर्च और बेहतर पेंशन व्यवस्था की आवश्यकता एक व्यापक संशोधन को उचित ठहराती है. खबरों के अनुसार, कई कर्मचारी ग्रुप 3.0 से 4.0 के बीच फिटमेंट फैक्टर की मांग कर रहे हैं, जिससे न्यूनतम बेसिक लेवल पर बड़ी बढ़ोतरी हो सकती है। 

अगर 3.8 से 4.0 की लिमिट में फिटमेंट फैक्टर को मंजूरी मिल जाती है, तो हितधारकों के साथ परामर्श के दौरान चर्चा किए गए अनुमानों के अनुसार, न्यूनतम मूल वेतन संभावित रूप से ₹69,000 और ₹72,000 के बीच बढ़ सकता है। 

Share This Article
Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *