नौकरी आवेदन में देरी पड़ी भारी, उपभोक्ता आयोग ने डाक विभाग को मुआवजा देने के दिए आदेश

Editor
2 Min Read

बलौदा बाजार.

स्पीड पोस्ट से भेजे गए संविदा नौकरी के एक नहीं बल्कि तीन-तीन आवेदनों को डाक विभाग समय पर नहीं पहुंचा सका. हताश-परेशान आवेदक ने उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग में अर्जी दाखिल की. आयोग ने पूरा मामला सुनने के बाद डाक विभाग को सेवा में कमी का दोषी मान डाक शुल्क के साथ परिवादी को मानसिक क्षति पूर्ति राशि देने का आदेश दिया है.

लवन निवासी परिवादिनी पूनम चौहान ने तीन अलग-अलग पदों पर संविदा नियुक्ति हेतु आवेदन पत्र लवन डाकघर से स्पीड पोस्ट के जरिए 12 मार्च 2025 को मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी जिला बलौदाबाजार -भाटापारा को भेजा था. आवेदन पत्र पहुंचने की अंतिम तिथि 17 मई 2025 थी, लेकिन समयावधि बीतने के बाद 19 मई को बंद लिफाफे में प्राप्त आवेदनों को सीएमएचओ कार्यालय ने लेने से इंकार करने हुए वापस भेज दिया.

डाक विभाग की लापरवाही से परिवादिनी उक्त संविदा पदों में से एक पद में भर्ती होने का अवसर चूक गई. इस पर परिवादिनी ने समयावधि में डाक नहीं पहुंचने तथा डाक विभाग की लापरवाही के कारण मानसिक पीड़ा की क्षतिपूर्ति राशि के लिए बलौदाबाजार जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग में परिवाद प्रस्तुत किया था. आयोग के अध्यक्ष रंजना दत्ता एवं सदस्यगण हरजीत सिंह चावला व शारदा सोनी ने पेश दस्तावेजों एवं संबंधित नियम आदि का सूक्ष्मता से अध्ययन कर पाया कि विरोधी पक्षकार द्वारा अनेक कारणों से डाक को तय समय पर नहीं पहुंचाया गया, जो विरोधी पक्षकार का उक्त तर्क मान्य करने योग्य नहीं है. विरोधी पक्षकार की ओर से समुचित साधनों का उपयोग न कर सेवा में कमी प्रमाणित किया है.

इस पर आयोग ने उप डाकपाल लवन तथा मुख्य पोस्ट मास्टर जनरल, रायपुर को सेवा में कमी का आंशिक दोषी मानते हुए डाक के एवज में लिए शुल्क के तौर पर परिवादिनी को 123 रुपए एवं मानसिक एवं आर्थिक क्षतिपूर्ति के लिए 10,000 रुपए और वाद-व्यय के लिए 3000 रुपए प्रदाय करने का आदेश दिया है.

Share This Article
Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

YouTube Reporters Support Directors Live