MP हाईकोर्ट की तल्ख टिप्पणी, 9 साल जेल में बंद अपीलार्थी को ट्रायल कोर्ट ने किया बरी

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जबलपुर
 हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल व न्यायमूर्ति अवनींद्र कुमार सिंह की युगलपीठ ने अपनी तल्ख टिप्पणी में कहा कि ट्रायल कोर्ट ने मामले का ट्रैक खो दिया और हुक या क्रूक से दोषसिद्धि का निर्णय पारित किया। यह अपीलार्थी के साथ घोर अन्याय है। लिहाजा, नौ वर्ष से जेल में बंद अपीलार्थी को दोषमुक्त करार दिया जाता है।
बहुचर्चित मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहा है

अपीलकर्ता मंडीदीप, रायसेन निवासी संजय गुप्ता की ओर से अधिवक्ता आनंद कुमार शुक्ला, आशीष त्रिवेदी, प्रशांत अवस्थी व असीम त्रिवेदी ने पक्ष रखा। उन्हाेंने दलील दी कि अपीलार्थी 12 वर्षीय नितिन की हत्या के बहुचर्चित मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहा है।

हत्या की और शव को बोरे में भरकर कूड़े में फेंक दिया
रायसेन की ट्रायल कोर्ट ने उसके विरुद्ध तीन अप्रैल, 2017 को उम्रकैद व 17 हजार जुर्माने का फैसला सुनाया था। तब से नौ वर्ष हो गए, वह जेल की सलाखों में है। उस पर आरोप लगाया गया था कि उसने नितिन को घर पर बुलाया। हत्या की और शव को बोरे में भरकर कूड़े में फेंक दिया।

बचाव पक्ष के वकीलों की ये रही दलीलें
अपीलकर्ता के वकीलों ने दलील दी कि लास्ट सीन गवाह साहब सिंह ने नितिन को संजय के साथ नहीं, उसके बेटे के साथ देखा था। गवाह प्रेमसिंह लोवंशी ने बताया कि घटना तिथि सात अप्रैल, 2015 को संजय गुप्ता सुबह 8:30 से शाम पांच बजे तक आकाश फैक्ट्री में ड्यूटी पर था और रात आठ बजे से भोपाल में मालिक की बेटी की बर्थडे पार्टी में शामिल था। पुलिस ने ज्ञापन दो माह बाद चार जून, 2015 को बनाया और जब्त सामग्री एफएसएल जांच के लिए चार-छह माह बाद 30 अक्टूबर, 2015 को भेजी।

ये रहा हाई कोर्ट का निष्कर्ष
हाई कोर्ट ने पाया कि ट्रायल कोर्ट ने जिस सेमी लिक्विड ब्लड को संजय के बाथरूम से बरामद बताया, उसकी कोई बरामदगी नौ अप्रैल, 2015 के पंचनामा में दर्ज ही नहीं है। बरामद स्लिपर का साइज दर्ज नहीं, खुले प्लाट से मिली इसलिए महत्वहीन है। हथौड़े से चोट का मेडिकल कनेक्शन साबित नहीं, पेचकस पर फिंगर प्रिंट नहीं लिए गए।

केस डायरी और कोर्ट में विरोधाभासी कार से मोटरसाइकिल हो गई
गवाह साहब सिंह के बयान केस डायरी और कोर्ट में विरोधाभासी कार से मोटरसाइकिल हो गई। एफएसएल चेन आफ कस्टडी टूटी, छह माह तक माल थाने में रखा गया। हाई कोर्ट ने इन तथ्यों के आधार पर ने सुप्रीम कोर्ट के शरद बिरधीचंद सारदा केस का हवाला देकर कहा कि परिस्थितिजन्य साक्ष्य में एक भी कड़ी टूटने पर दोषसिद्धि नहीं हो सकती। लिहाजा, दोषसिद्धि व दंडादेश निरस्त कर संजय गुप्ता को सभी आरोपों से बरी कर तत्काल रिहा करने का आदेश दिया जाता है।

 

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