10.09 सेकंड की रफ्तार पर फिदा हुए PM मोदी, ‘मन की बात’ में गुरिंदरवीर से पूछा सफलता का राज

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10.09 सेकंड की रफ्तार पर फिदा हुए PM मोदी, ‘मन की बात’ में गुरिंदरवीर से पूछा सफलता का राज
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जालंधर.

पंजाब के जालंधर के युवा धावक गुरिंदरवीर सिंह ने अपनी रफ्तार से देशभर का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। हाल ही में रांची में आयोजित राष्ट्रीय फेडरेशन कप एथलेटिक्स प्रतियोगिता में गुरिंदरवीर सिंह ने 100 मीटर दौड़ महज 10.09 सेकंड में पूरी कर नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड कायम किया।

इस ऐतिहासिक उपलब्धि के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ में गुरिंदरवीर सिंह की खुलकर सराहना की और उनसे सीधे बातचीत कर उनके संघर्ष और सफलता की कहानी देशवासियों तक पहुंचाई।
प्रधानमंत्री ने कार्यक्रम में कहा कि रांची में आयोजित राष्ट्रीय प्रतियोगिता के दौरान कई राष्ट्रीय रिकॉर्ड टूटे, लेकिन पुरुष 100 मीटर दौड़ में दो दिनों के भीतर तीन बार रिकॉर्ड टूटना पूरे देश में चर्चा का विषय बन गया। इसी उपलब्धि के कारण गुरिंदरवीर सिंह और अनिमेष कुजूर को ‘मन की बात’ कार्यक्रम में आमंत्रित किया गया।

भारतीय नौसेना में ऑफिसर हैं गुरविंदर
बातचीत के दौरान गुरिंदरवीर सिंह ने बताया कि वह भारतीय नौसेना में पेटी ऑफिसर हैं और उनका सपना ट्रैक पर भी देश का नाम रोशन करना तथा वर्दी में भी राष्ट्र सेवा करना है। उन्होंने बताया कि उनके पिता और दादा दोनों खिलाड़ी रहे हैं। बचपन में जब वह उनके पदक और ट्रॉफियां साफ करते थे, तभी उनके मन में भी खिलाड़ी बनने का सपना जागा।
गुरिंदरवीर ने प्रधानमंत्री को बताया कि एक समय ऐसा भी था जब लोगों ने उन्हें कहा कि 100 मीटर दौड़ भारतीय खिलाड़ियों के लिए उपयुक्त स्पर्धा नहीं है। कई लोगों का मानना था कि भारतीय धावक इस स्पर्धा में विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धा नहीं कर सकते। लेकिन उनके पिता ने हमेशा उन्हें आगे बढ़ने और असंभव को संभव करने की प्रेरणा दी। यही विश्वास उनकी सबसे बड़ी ताकत बना।

संघर्ष व अनुशासन को बताया सफलता का राज
प्रधानमंत्री ने जब उनसे सफलता का राज पूछा तो गुरिंदरवीर ने कहा कि संघर्ष, अनुशासन, परिवार का सहयोग और प्रशिक्षकों का मार्गदर्शन उन्हें लगातार आगे बढ़ाता रहा। हार और चोट के दौर में भी परिवार ने उनका मनोबल नहीं टूटने दिया। कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने दोनों खिलाड़ियों की खेल भावना की भी सराहना की। गुरिंदरवीर ने बताया कि मैदान के बाहर वह और अनिमेष अच्छे मित्र हैं, लेकिन प्रतियोगिता के दौरान दोनों एक-दूसरे को बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरित करते हैं। यही स्वस्थ प्रतिस्पर्धा भारतीय दौड़ को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा रही है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बातचीत के अंत में गुरिंदरवीर सिंह और अनिमेष कुजूर को शुभकामनाएं देते हुए विश्वास जताया कि दोनों खिलाड़ी भविष्य में भी देश का नाम विश्व स्तर पर रोशन करेंगे। ‘मन की बात’ में मिली इस विशेष पहचान के बाद पंजाब ही नहीं, पूरे देश के खेल प्रेमियों में गुरिंदरवीर सिंह की उपलब्धि को लेकर गर्व का माहौल है। साथियो, एक स्पर्धा जिसकी पूरे देश में सबसे अधिक चर्चा हुई, वह थी 100 मीटर दौड़। महज दो दिनों के भीतर पुरुष 100 मीटर दौड़ का राष्ट्रीय रिकॉर्ड तीन बार टूटा। यह उपलब्धि हासिल करने वाले दो खिलाड़ी हैं—गुरिंदरवीर सिंह और अनिमेष कुजूर। मैंने सोचा कि इस बार ‘मन की बात’ में इन दोनों खिलाड़ियों से बातचीत की जाए, ताकि देशवासी इनके संघर्ष और सफलता की कहानी सुन सकें।
प्रधानमंत्री: अनिमेष जी नमस्कार। गुरिंदरवीर जी, आपको भी नमस्कार, सत श्री अकाल।
अनिमेष कुजूर और गुरिंदरवीर सिंह: नमस्कार सर।
प्रधानमंत्री: आप दोनों ने अद्भुत उपलब्धि हासिल की है। संगीत में तो जुगलबंदी के बारे में सुना था, लेकिन खेल में इस तरह की सकारात्मक प्रतिस्पर्धा कम ही देखने को मिलती है। आप दोनों ने एक-दूसरे को चुनौती दी और फिर उससे आगे निकलने का प्रयास किया। मैं चाहता हूं कि ‘मन की बात’ के श्रोता आपके बारे में अधिक जानें। पहले अनिमेष जी, आप अपने बारे में बताइए।
अनिमेष कुजूर: सर, मेरा नाम अनिमेष कुजूर है। मैं 200 मीटर और 400 मीटर स्पर्धा का राष्ट्रीय रिकॉर्ड धारक हूं। मेरा संबंध छत्तीसगढ़ से है और वर्तमान में मैं ओडिशा की ओर से खेलता हूं। पिछले वर्ष मैं एशियाई प्रतियोगिता और विश्व विश्वविद्यालय खेलों में पदक जीतकर लौटा था।
मैंने वर्ष 2021 में एथलेटिक्स की शुरुआत की। उससे पहले मैं सैनिक विद्यालय, अंबिकापुर में पढ़ता था और फुटबॉल खेलता था। कोविड काल के दौरान मेरे माता-पिता मुझे बाहर जाकर दौड़ने और खेलने की अनुमति देते थे।
बाद में मेरे मित्रों ने मुझे राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए प्रेरित किया। मुझे यह भी नहीं पता था कि वहां से राष्ट्रीय स्तर के लिए चयन होगा। वहीं से मेरा चयन हुआ और आज मैं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व कर रहा हूं।
प्रधानमंत्री: बहुत अच्छा। अब गुरिंदरवीर जी, आप अपनी कहानी बताइए।
गुरिंदरवीर सिंह: नमस्कार सर। मेरा नाम गुरिंदरवीर सिंह है। मैं भारतीय नौसेना में पेटी ऑफिसर हूं और हाल ही में मैंने 100 मीटर दौड़ में 10.09 सेकंड का राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया है। मैं पहला भारतीय हूं जिसने 10.1 सेकंड की बाधा को पार किया है। मेरा प्रयास है कि मैं ट्रैक पर भी और वर्दी में भी देश की सेवा करूं।
मेरे पिता और दादा दोनों खिलाड़ी रहे हैं। बचपन में जब भी घर की सफाई होती थी, मैं उनके पदक और ट्रॉफियां साफ करता था। उन्हें देखकर मेरे मन में जिज्ञासा पैदा होती थी कि ये सम्मान कैसे मिले। तब मेरे पिता मुझे अपनी खेल यात्राओं की कहानियां सुनाते थे। वहीं से मेरे भीतर भी खिलाड़ी बनने का सपना पैदा हुआ।
वे सुबह दौड़ने जाते थे, तो मैं भी उनके साथ जाने लगा। उन्होंने जो कुछ खेलों से सीखा था, वह मुझे सिखाना शुरू किया। इसी दौरान मैंने उसेन बोल्ट को विश्व रिकॉर्ड बनाते देखा। तब मैंने अपनी मां से मजाक में कहा था कि आज आप मुझे टेलीविजन देखने नहीं दे रहीं, लेकिन एक दिन ऐसा आएगा जब आप मुझे टेलीविजन पर खोजेंगी। आज जब मेरी मां मुझे दौड़ते हुए देखती हैं तो मुझे बहुत खुशी होती है।
हम एक मध्यमवर्गीय परिवार से हैं। मेरे पिता वॉलीबॉल खिलाड़ी थे, लेकिन पारिवारिक जिम्मेदारियों के कारण उन्हें खेल छोड़ना पड़ा। उनका अधूरा सपना उन्होंने मेरे भीतर देखा। वे हमेशा कहते थे कि सपने केवल देखने से पूरे नहीं होते, उनके लिए कड़ी मेहनत करनी पड़ती है। वे मुझे मिल्खा सिंह जी के संघर्ष और मेहनत की कहानियां सुनाते थे, जो मुझे बहुत प्रेरित करती थीं।
जब मैंने 100 मीटर स्पर्धा चुनी, तब कई लोगों ने कहा कि यह भारतीयों के लिए उपयुक्त स्पर्धा नहीं है। लेकिन मेरे पिता हमेशा कहते थे कि यदि लोग कहते हैं कि यह संभव नहीं है, तो हमें करके दिखाना है। उनके विश्वास ने मुझे आगे बढ़ने की ताकत दी।
प्रधानमंत्री: आप दोनों ने बहुत बड़ी उपलब्धि हासिल की है। इतने कठिन खेल में सफलता पाने के लिए कौन-सी भावना और कौन-सा संकल्प आपको आगे बढ़ाता रहा?
गुरिंदरवीर सिंह: सर, शुरुआत में संघर्ष बहुत था। कई बार मन में संदेह भी आया। लेकिन मेरे परिवार ने हमेशा मेरा साथ दिया। जब मैं हारता था या चोटिल हो जाता था, तब वे कहते थे कि एक असफलता से जीवन खत्म नहीं हो जाता। मेरे प्रशिक्षक भी हमेशा कहते थे कि यदि तुम प्रयास नहीं करोगे, तो कोई और भी नहीं कर पाएगा। परिवार और समाज का यही विश्वास मुझे आगे बढ़ाता रहा।
अनिमेष कुजूर: सर, जब मैंने एथलेटिक्स शुरू की तो बहुत लोगों ने कहा कि यह नया क्षेत्र है, शायद मैं सफल नहीं हो पाऊंगा। लेकिन मेरे पिता हमेशा कहते थे कि जिस रास्ते पर चलने का निर्णय लिया है, उस पर पीछे मुड़कर नहीं देखना चाहिए। उन्होंने मुझे हर प्रकार का सहयोग दिया।
लोग कहते थे कि भारतीय धावक विश्व स्तर पर स्प्रिंट नहीं कर सकते। लेकिन हमने साबित किया है कि भारतीय खिलाड़ी भी किसी से कम नहीं हैं। लगातार प्रशिक्षण और मेहनत से हम अपने प्रदर्शन में सुधार कर रहे हैं। अब हमारा चयन राष्ट्रमंडल खेलों के लिए भी हो गया है और वहां भी हम देश का नाम रोशन करने का प्रयास करेंगे।
प्रधानमंत्री: मेरे मन में एक सवाल है। क्या आप दोनों ने पहले से तय कर रखा था कि एक-दूसरे का रिकॉर्ड तोड़ना है?
अनिमेष कुजूर: सर, पहले 10.18 सेकंड का राष्ट्रीय रिकॉर्ड मेरे नाम था। फिर गुरिंदरवीर भाई ने उसे 10.17 सेकंड के साथ तोड़ दिया। उसके बाद मैंने 10.15 सेकंड का समय निकालकर नया रिकॉर्ड बना दिया। लेकिन सच कहूं तो हम दोनों रिकॉर्ड टूटने से खुश थे, क्योंकि इससे भारतीय स्प्रिंटिंग को नई पहचान मिल रही थी।
हम सऊदी अरब में एक प्रतियोगिता के दौरान साथ रहे थे। वहीं हमने तय किया था कि भारतीय स्प्रिंटिंग को आगे ले जाना है। हमारी सफलता दूसरे खिलाड़ियों को भी प्रेरित करेगी।
प्रधानमंत्री: गुरिंदरवीर जी, आप क्या कहना चाहेंगे?
गुरिंदरवीर सिंह: सर, हम दोनों एक-दूसरे की मदद करते हैं। रिकॉर्ड बनाने से पहले भी हम वार्म-अप के दौरान एक-दूसरे को सलाह दे रहे थे। मैदान के बाहर हम अच्छे मित्र हैं, लेकिन मैदान के भीतर हम प्रतिस्पर्धी बन जाते हैं। दोनों की कोशिश रहती है कि बेहतर प्रदर्शन करें। यही स्वस्थ प्रतिस्पर्धा हमें आगे बढ़ाती है।
प्रधानमंत्री: आपने जो उदाहरण प्रस्तुत किया है, वह खेल भावना की शानदार मिसाल है। एक-दूसरे को चुनौती देना, आगे निकलने का प्रयास करना और फिर भी एक-दूसरे की मदद करना वास्तव में प्रेरणादायक है। मुझे विश्वास है कि आप दोनों भविष्य में भी देश का नाम रोशन करेंगे। मेरी ओर से आप दोनों को बहुत-बहुत शुभकामनाएं।
गुरिंदरवीर सिंह और अनिमेष कुजूर: बहुत-बहुत धन्यवाद सर।

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