3 जून को CM पद की शपथ ले सकते हैं DK शिवकुमार, कर्नाटक राजनीति में हलचल तेज

Editor
4 Min Read
3 जून को CM पद की शपथ ले सकते हैं DK शिवकुमार, कर्नाटक राजनीति में हलचल तेज
WhatsApp Share on WhatsApp
add_action('wp_footer', 'jazzbaat_new_version_modal'); function jazzbaat_new_version_modal() { ?>
SW24news • Beta

बेंगलुरु 

कर्नाटक में चल रही सियासी उथल-पुथल के बीच बड़ा अपडेट सामने आया है। सूत्रों का कहना है कि डीके शिवकुमार 3 जून यानी बुधवार को मुख्यमंत्री पद की शपथ ले सकते हैं। उनके साथ 10 अन्य मंत्री भी शपथ ले सकते हैं। इसके बाद 18 जून के बाद कैबिनेट का विस्तार किया जा सकता है। राज्यसभा चुनाव होने के बाद कर्नाटक में कैबिनेट विस्तार की संभावना है।

कैबिनेट में भी बड़ा फेरबदल
राज्य सरकार में चल रहे नेतृत्व परिवर्तन के बीच पार्टी नेतृत्व शनिवार को होने वाली कांग्रेस विधायक दल (CLP) की एक महत्वपूर्ण बैठक की तैयारी कर रहा है। सूत्रों का कहना है कि डीके शिवकुमार की कैबिनेट में 50 फीसदी नए चेहरे हो कते हैं कर्नाटक विधान परिषद के चीफ विप सलीम अहमद ने शुक्रवार को कहा कि कैबिनेट के गठन, क्षेत्रीय एवं सामाजिक (जातीय) प्रतिनिधित्व और संभावित उप-मुख्यमंत्रियों की नियुक्ति के संबंध में अंतिम निर्णय सीएलपी बैठक के बाद कांग्रेस आलाकमान की ओर से लिया जाएगा।

शाम तक हो सकती है औपचारिक घोषणा
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता केसी वेणुगोपाल और रणदीप सुरजेवाला इस बैठक में शामिल होने वाल हैं। शाम तक मुख्यमंत्री के नाम की औपचारिक घोषणा भी हो सकती है। इसके बाद शपथ ग्रहण की तारीख का भी ऐलान किया जा सकता है। बता दें कि मुख्यमंत्री सिद्दारमैया के कांग्रेस आलाकमान के निर्देशों के बाद अपना इस्तीफा सौंप दिया है और राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने शुक्रवार को इस्तीफा स्वीकार कर लिया।

कम नहीं होगा सिद्धारमैया का दबदबा
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि विधायकों, पिछड़ा वर्ग समूहों और जमीनी कार्यकर्ताओं पर श्री सिद्दारमैया की मजबूत पकड़ सत्ता के औपचारिक हस्तांतरण के बाद भी राज्य कांग्रेस की दिशा तय करती रहेगी। कांग्रेस आलाकमान सिद्दारमैया के प्रभावशाली 'अहिंडा' सामाजिक गठबंधन (जिसमें अल्पसंख्यक, पिछड़ा वर्ग और दलित शामिल हैं) को छेड़ने से बच रहा है। यह गठबंधन कर्नाटक में पार्टी की चुनावी सफलता का मुख्य केंद्र रहा है।

राज्यसभा का ऑफर क्यों नकारा?
राज्यसभा की भूमिका स्वीकार करने के बजाय कर्नाटक की राजनीति में ही सक्रिय रहने का सिद्दारमैया का फैसला साफ संकेत देता है कि वे राज्य के राजनीतिक मामलों में अपना सीधा प्रभाव बनाए रखना चाहते हैं। कांग्रेस नेतृत्व के सामने अब दो शक्ति केंद्रों के बीच संतुलन बनाने का कठिन काम है – सरकार पर शिवकुमार का नियंत्रण और पार्टी के सामाजिक व संगठनात्मक आधार पर सिद्दारमैया का प्रभाव। इसके अलावा, कांग्रेस के रणनीतिकारों को डर है कि इस नेतृत्व परिवर्तन से पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यकों का समर्थन कमजोर हो सकता है, क्योंकि ये वर्ग वर्षों से सिद्दारमैया के साथ मजबूती से जुड़े रहे हैं।

सीएम बनने के बाद शुरू होगी असली चुनौती
जानकारों का मानना है कि डीके शिवकुमार की असली परीक्षा पद संभालने के बाद शुरू हो सकती है, जहां उन्हें प्रशासनिक नियंत्रण सुनिश्चित करना होगा और साथ ही सिद्दारमैया के खेमे को कर्नाटक कांग्रेस के भीतर एक समानांतर राजनीतिक व्यवस्था के रूप में विकसित होने से रोकना होगा।

Share This Article
Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *