चंडीगढ़.
पूर्व अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर और राज्यसभा सदस्य रहे हरभजन सिंह की सुरक्षा वापस लेने के मामले में पंजाब सरकार ने पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में जवाब दाखिल कर कहा है कि केंद्र सरकार द्वारा उन्हें पहले ही ‘वाई प्लस’ श्रेणी की सुरक्षा उपलब्ध कराई जा चुकी है, इसलिए राज्य से समानांतर सुरक्षा जारी रखने की प्रशासनिक या कानूनी आवश्यकता नहीं बचती।
पंजाब पुलिस के एडीजीपी (सिक्योरिटी) मंदीप सिंह द्वारा दायर शार्ट रिप्लाई में कहा गया कि हरभजन सिंह ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर 25 अप्रैल 2026 के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसके तहत उनकी राज्य सुरक्षा वापस ली गई थी।
साथ ही उन्होंने सुरक्षा बहाल करने की मांग की है। राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि 30 अप्रैल 2026 को सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने अंतरिम आदेश देते हुए यह सुनिश्चित करने को कहा था कि पंजाब में रहते समय याचिकाकर्ता अथवा उनके परिवार को किसी प्रकार की शारीरिक क्षति न पहुंचे।
स्थानीय स्तर पर सुरक्षा प्रबंध जारी रखे
इसके बाद स्थानीय स्तर पर सुरक्षा प्रबंध जारी रखे गए। हलफनामे में कहा गया कि हरभजन सिंह पूर्व अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर और राज्यसभा सदस्य रहे हैं, इसलिए प्रारंभिक आकलन के आधार पर उन्हें पहले पर्याप्त सुरक्षा उपलब्ध कराई गई थी।
हालांकि 3 मार्च 2026 को जालंधर में सिक्योरिटी रिव्यू कमेटी की बैठक में खतरे का पुनर्मूल्यांकन किया गया, जिसमें किसी विशेष खतरे की पुष्टि नहीं हुई। पंजाब सरकार ने अदालत को बताया कि हरभजन सिंह अधिकतर समय पंजाब से बाहर रहते हैं और राज्य के भीतर उनकी गतिविधियां सीमित पाई गईं। इसी कारण जालंधर पुलिस कमिश्नर को स्थानीय स्तर पर सुरक्षा व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए तथा पहले तैनात सुरक्षा कर्मियों को वापस बुला लिया गया। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि 4 मई 2026 को केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से औपचारिक सूचना प्राप्त हुई थी कि हरभजन सिंह को केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के माध्यम से ‘वाई प्लस’ श्रेणी की सुरक्षा प्रदान की गई है।
राज्य ने कहा कि यह उच्च स्तरीय सुरक्षा है और इसके बाद राज्य सुरक्षा को जारी रखना संसाधनों की अनावश्यक पुनरावृत्ति होगा। हलफनामे में यह भी कहा गया कि याचिकाकर्ता को कभी असुरक्षित नहीं छोड़ा गया। स्थानीय पुलिस के माध्यम से सुरक्षा व्यवस्था लगातार जारी रही। राज्य ने आरोपों को राजनीतिक प्रतिशोध बताने के दावे को भी खारिज करते हुए कहा कि सुरक्षा में बदलाव पूरी तरह प्रशासनिक आकलन और स्थापित नियमों के अनुसार किया गया।
पंजाब सरकार ने हाई कोर्ट के पूर्व निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि सुरक्षा को “स्टेटस सिंबल” नहीं बनाया जा सकता और किसी व्यक्ति को अनिश्चितकाल तक व्यक्तिगत सुरक्षा पाने का मौलिक अधिकार नहीं है। सरकार के अनुसार खतरे के वास्तविक आकलन के आधार पर ही सुरक्षा दी या हटाई जाती है।
