राजस्थान बॉर्डर पर बनेगा ‘चतुष्कोणीय सुरक्षा ग्रिड’, अमित शाह का बड़ा सुरक्षा ब्लूप्रिंट

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जयपुर

राजस्थान की अंतरराष्ट्रीय सीमा अब पहले से ज्यादा मजबूत और आधुनिक होने जा रही है. राजस्थान की पाकिस्तान सीमा का सुरक्षा का पूरा मॉडल बदलने जा रहा है. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बीकानेर के सांचू पोस्ट दौरे के बाद अब बॉर्डर पर "चतुष्कोणीय सुरक्षा ग्रिड" तैयार करने की रणनीति तैयार की गई है. यानी बीएसएफ, सेना, स्थानीय नागरिक और प्रशासन मिलकर सीमा सुरक्षा की नई दीवार बनेंगे. इसके साथ ही सीमावर्ती गांवों को हाईटेक और आत्मनिर्भर बनाने की बड़ी तैयारी भी शुरू हो चुकी है. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह परसों, 25 मई की रात दो दिन के दौर पर बीकानेर आए थे. उन्होंने राजस्थान के 5 बॉर्डर जिलों के DM-SP के साथ अहम बैठक की थी.

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बीकानेर में हुई हाईलेवल बैठक में राजस्थान के सीमावर्ती जिलों के लिए बड़ा सुरक्षा ब्लूप्रिंट तैयार किया है. भारत-पाक सीमा से 15 किलोमीटर तक अवैध निर्माण पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं. शाह ने साफ कहा है कि जीरो टॉलरेंस नीति के तहत अवैध निर्माण तुरंत ध्वस्त किए जाएं. बैठक में घुसपैठ और ड्रग्स तस्करी रोकने के लिए संयुक्त एक्शन प्लान पर जोर दिया गया. BSF, NCB, CBDT और राज्य एजेंसियां मिलकर बॉर्डर मैनेजमेंट करेंगी. डीएम को बड़े अधिकार दिए जाएंगे. फर्जी कंपनियों, शेल अकाउंट्स, नकली आधार कार्ड और संदिग्ध फंडिंग की जांच के भी निर्देश दिए गए हैं.
 
बीएसएफ, सेना, नागरिक और प्रशासन का "चतुष्कोणीय सुरक्षा ग्रिड"
साइबर क्राइम रोकने के लिए 1930 हेल्पलाइन के प्रभावी इस्तेमाल और नए आपराधिक कानूनों के सख्त क्रियान्वयन पर भी जोर दिया गया. कल, 26 मई को बीकानेर के सांचू पोस्ट पहुंचे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने संदेश दिया कि सीमा सुरक्षा अब सिर्फ हथियारों से नहीं, बल्कि तकनीक, स्थानीय लोगों और प्रशासन के तालमेल से मजबूत होगी. अमित शाह ने बीएसएफ, सेना, जागरूक नागरिक और प्रशासन को मिलाकर "चतुष्कोणीय सुरक्षा ग्रिड" बनाने की बात कही है. यानी सीमा के उस पार से होने वाली हर गतिविधि पर चौतरफा निगरानी रखी जाएगी.

सीमा को बनाया जाएगा ड्रोन रोधी
पाकिस्तान से लगती सीमा सुरक्षा को हाईटेक बनाने के लिए अब कई बड़े कदम उठाए जा रहे हैं. अंतरराष्ट्रीय सीमा पर नई डिजाइन की फेंसिंग लगाई जा रही है. ड्रोन रोधी सिस्टम अगले छह महीने में शुरू करने की तैयारी है. 1096 किलोमीटर लंबी लिटरल रोड और 520 किलोमीटर लंबी एक्ससीएल रोड का निर्माण भी किया जा रहा है ताकि जवानों की आवाजाही और निगरानी आसान हो सके. बीएसएफ चौकियों तक पाइपलाइन से पानी पहुंचाने का काम भी तेजी से चल रहा है. वहीं महिला जवानों के लिए आधुनिक बैरक बनाए जा रहे हैं.

सीमावर्ती गांवों की बदलेगी तस्वीर
वाईब्रेंट विलेज प्रोग्राम-2 के तहत राजस्थान के पांच सीमावर्ती जिलों के 184 रणनीतिक गांवों को चुना गया है. इन गांवों में सड़क, बिजली, मोबाइल नेटवर्क, टीवी कनेक्टिविटी, स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यटन और रोजगार से जुड़े विकास कार्य किए जाएंगे. हर गांव पर करीब 3 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे. श्रीगंगानगर, बीकानेर, जैसलमेर, बाड़मेर और फलौदी के गांव अब सिर्फ सीमा के आखिरी गांव नहीं, बल्कि देश की पहली सुरक्षा लाइन बनेंगे.

मुख्यमंत्री थार सीमा विकास कार्यक्रम से भी विकास
राज्य सरकार ने मुख्यमंत्री थार सीमा विकास कार्यक्रम के जरिए भी सीमावर्ती इलाकों के विकास को गति दी है. इसके तहत 1 हजार 206 गांवों में बिजली, पानी, स्वास्थ्य, शिक्षा और आधारभूत ढांचे से जुड़े एक हजार से ज्यादा काम स्वीकृत किए गए हैं.

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