IGIMS में 45 लाख का आयुष्मान घोटाला, जांच के लिए SIT गठित

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IGIMS में 45 लाख का आयुष्मान घोटाला, जांच के लिए SIT गठित
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पटना

पटना स्थित आईजीआईएमएस (IGIMS) में आयुष्मान घोटाले की जांच के लिए पुलिस और संस्थान की ओर से मंगलवार को दो अलग-अलग कमेटियां गठित की गईं। आईजीआईएमएस ने छह सदस्यीय कमेटी का गठन किया है, जो घोटाले के हर बिंदु पर जांच करेगी। इधर पुलिस ने इस मामले के आरोपित चार संविदा कर्मियों की गिरफ्तारी के लिए एसआईटी गठित की है।

आईजीआईएमएस में अब तक 45 लाख का आयुष्मान भारत योजना (Ayushman Bharat Yojna) में घोटाले की बात सामने आई है, लेकिन संस्थान के अधिकारियों की मानें तो यह राशि और बढ़ सकती है। आईजीआईएमएस में एक प्रशासनिक अधिकारी की अध्यक्षता में कमेटी गठित की गई है। कमेटी में संस्थान के पदाधिकारियों के अलावा एक स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी को भी शामिल किया गया है। कमेटी की बुधवार को इस विषय पर बैठक होनी है।

संस्थान के पदाधिकारियों की मानें तो आयुष्मान कार्ड का सॉफ्टवेयर तैयार करने वाली कंपनी और आउटसोसिंग एजेंसी के कर्मियों की मिलीभगत से आयुष्मान कार्ड धारकों के साथ छलावा किया है। इसकी विस्तृत जांच कराई जाएगी। आईजीआईएमएस में आयुष्मान भारत योजना का लाभ मरीजों को 2018 से मिल रहा है।

इधर, इस मामले में आरोपित आउटसोर्सिंग कंपनी के कर्मी अमरजीत राय, चंदन कुमार, साकेत कुमार और अभिषेक की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी चल रही है। एक कर्मी को हिरासत में लेकर पूछताछ चल रही है। टाउन डीएसपी-2 साकेत कुमार ने बताया कि आईजीआईएमएस ने शास्त्रीनगर थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई है। सभी बिंदुओं पर जांच चल रही है।

कैसे खुला राज
अक्तूबर 2025 में मुजफ्फरपुर के गायघाट प्रखंड के बाघाखाल गांव निवासी 46 वर्षीय मनोज झा को दलालों ने उनके आयुष्मान कार्ड के इस्तेमाल करने के बदले में 40 हजार देने का आश्वासन दिया था। उन्होंने अपना कार्ड तो दे दिया, पर दलालों ने उन्हें 40 हजार नहीं दिये। इसकी उन्होंने आईजीआईएमएस में लिखित शिकायत की। मामले की छानबीन की गई तो पाया गया कि मनोज झा का अस्पताल में उपचार ही नहीं हुआ है, जबकि आयुष्मान भारत योजना के तहत बने कार्ड से 40 हजार की निकासी कर ली गई है। यह कैसे हुआ? संस्थान के पदाधिकारी भी नहीं समझ पाए। इसके बाद प्रशासनिक अधिकारियों ने योजना के अंतर्गत बने कार्ड से अन्य मरीजों की जांच शुरू की तो पता चला कि बड़े पैमाने पर इस प्रकार का फर्जीवाड़ा किया गया है। इसमें एक बड़ा गिरोह सक्रिय है।

इन बिंदुओं पर होगी जांच
– किस स्तर तक गड़बड़ी की गई है, किन कारणों से ऐसी गड़बड़ी हुई

– आयुष्मान के लिए जो सॉफ्टवेयर बनाया गया है उसमें क्या खामी थी

– जिस एजेंसी ने सॉफ्टवेयर बनाया था वह कैसे निगरानी रख रही थी

– आरोपित का कहां-कहां नेटवर्क है, इसमें कौन-कौन लोग हैं शामिल

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