बर्खास्तगी के बाद भी ग्रेच्युटी रोकना गलत, कोर्ट ने भुगतान का दिया आदेश

Editor
3 Min Read

ग्वालियर

पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के एक कर्मचारी की बर्खास्तगी के बाद ग्रेच्युटी रोकने के मामले में ग्वालियर हाईकोर्ट Gwalior Highcourt ने अहम फैसला सुनाया है। सिंगल बेंच ने कहा कि किसी कर्मचारी की सेवा समाप्ति या बर्खास्तगी मात्र से उसकी ग्रेच्युटी नहीं रोकी जा सकती। कोर्ट ने स्पष्ट टिप्पणी की कि ग्रेच्युटी कोई खैरात नहीं, बल्कि कर्मचारी की वर्षों की सेवा से अर्जित संपत्ति है। जस्टिस आनंद सिंह बहरावत की बेंच ने कंपनी को निर्देश दिए कि मृत कर्मी की पत्नी को सेवा समाप्ति की तारीख से वास्तविक भुगतान तक ब्याज सहित ग्रेच्युटी Gratuity राशि तीन माह के भीतर दी जाए। आदेश का पालन नहीं करने पर कंपनी को एक लाख रुपए हर्जाना भी देना होगा।

न्याय से वंचित नहीं किया जा सकता, कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ग्रेच्युटी भुगतान रोकने स्पष्ट कानूनी प्रावधान जरूरी

कोर्ट ने कंपनी की दलील खारिज कर कहा, कंपनी कार्यालय ग्वालियर और इंदौर दोनों स्थानों पर हैं। साथ ही याची 55 वर्षीय विधवा हैं। आठ वर्ष से न्याय के लिए संघर्ष कर रही हैं। ऐसे में सिर्फ तकनीकी आधार पर याचिका खारिज नहीं की जा सकती। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ग्रेच्युटी Gratuity भुगतान रोकने स्पष्ट कानूनी प्रावधान जरूरी है। सेवा समाप्ति के आधार पर कर्मी, आश्रितों को इस अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता।

विभागीय जांच के बाद 27 मार्च 2014 को सेवाएं समाप्त कर दी
याची मुबीना खान के पति शाजापुर में बिजली कंपनी में भृत्य थे। नियुक्ति 1995 में आकस्मिक कर्मचारी के रूप में हुई थी। 1997 में सेवाएं नियमित कर दी गईं। 2009 में अस्वस्थ होने के कारण वे बिना सूचना ड्यूटी से अनुपस्थित हो गए। विभागीय जांच के बाद 27 मार्च 2014 को सेवाएं समाप्त कर दी गईं। दिसंबर 2016 में कर्मी का निधन हो गया। इस पर मुबीना ने फंड और अन्य सेवा लाभों के लिए विभाग को नोटिस भेजा।

यह कहते हुए ग्रेच्युटी देने से इनकार कर दिया कि कर्मी को बर्खास्त किया जा चुका
कंपनी ने यह कहते हुए ग्रेच्युटी Gratuity देने से इनकार कर दिया कि कर्मी को बर्खास्त किया जा चुका था। 2018 में उन्होंने हाई कोर्ट में याचिका दायर की। कंपनी की ओर से दलील दी गई कि विभागीय जांच में कर्मचारी दोषी पाए गए थे, इसलिए वे ग्रेच्युटी के पात्र नहीं हैं। साथ ही यह भी कहा गया कि कर्मचारी शाजापुर में पदस्थ थे और कंपनी का मुख्यालय इंदौर में है, इसलिए ग्वालियर खंडपीठ में याचिका सुनवाई योग्य नहीं है।

TAGGED:
Share This Article
Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

YouTube Reporters Support Directors Live