Indore Honey Trap केस में सभी आरोपी जेल पहुंचे, निजी वीडियो को लेकर नया खुलासा

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Indore Honey Trap केस में सभी आरोपी जेल पहुंचे, निजी वीडियो को लेकर नया खुलासा
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इंदौर 
 इंदौर में हनी ट्रैप कहे जा रहे ब्लैकमेलिंग मामले में बड़ा एक्शन लेते हुए क्राइम ब्रांच ने गिरफ्तार सभी सात आरोपियों को बालेबाले मजिस्ट्रेट के घर पर पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया। इसी बीच सामने आया कि हनी ट्रैप-2 के नाम से चर्चा में आए गैंग की मास्टरमाइंड रेशू और श्वेता ने पुराने हनी ट्रैप प्रकरण के वीडियो का इस्तेमाल कर पांच लोगों को टारगेट बनाया था। पुलिस अब पूरे नेटवर्क की कड़ियां खंगाल रही है।

इंदौर में हनी ट्रैप कहे जा रहे ब्लैकमेलिंग मामले में कार्रवाई तेज कर दी गई है। क्राइम ब्रांच पुलिस ने घटना के लिए जिम्मेदार सभी सात आरोपियों को औपचारिक कार्यवाही के बाद सीधे बाले बाले मजिस्ट्रेट के घर ले जाकर पेश किया। सोमवार सुबह हुई इस पेशी में अदालत ने सभी आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेजने के आदेश दिए, जिसके बाद सातों को जेल रवाना कर दिया गया। पुलिस के इस कदम को मामले की गंभीरता और सुरक्षा कारणों से उठाया गया महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

इस बीच जांच में एक बड़ा खुलासा भी हुआ है। हनी ट्रैप-2 नाम से सामने आए इस नए जालसाजी नेटवर्क में मुख्य भूमिका रेशू और श्वेता बताई जा रही है। दोनों ने पुराने हनी ट्रैप कर कई अन्य मामले के संवेदनशील वीडियो हासिल कर लिए थे और इन्हीं के आधार पर पांच लोगों को ब्लैकमेल किया गया था। पुलिस सूत्रों के मुताबिक आरोपी पहले भरोसा जीतते थे, फिर निजी पलों के वीडियो दिखाकर पैसों की मांग की जाती थी।

मामले में शामिल अन्य आरोपियों की भूमिका भी इसी गिरोह के संचालन, तकनीकी काम और पैसे की वसूली से जुड़ी बताई जा रही है। क्राइम ब्रांच पिछले कुछ दिनों से लगातार इस गिरोह की गतिविधियों पर नजर रखे हुए थी। पर्याप्त सबूत मिलने के बाद ही सभी सात आरोपियों श्वेता जैन, रेशु चौधरी, अलका दीक्षित, जयदीप दीक्षित, लाखन जितेंद्र पुरोहित और पुलिस कर्मी  विनोद शर्मा को गिरफ्तार किया गया था, जिन्हें मजिस्ट्रेट ने न्यायिक हिरासत में जेल दाखिल कर दिया है। डीसीपी राजेश त्रिपाठी के मुताबिक अब पुलिस डिजिटल साक्ष्यों, लेन-देन और पुराने मामलों के लिंक की गहराई से जांच कर रही है साथ ही आरोपियों से जब्त मोबाइल फोरेंसिक लैब भेजे गए हैं जिनका डेटा रिकवर किया जा रहा है। त्रिपाठी का कहना है कि यह गैंग संगठित रूप से काम कर रहा था और आगे और खुलासे संभव हैं।

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