गौ संरक्षण बना यूपी की नई ताकत, योगी सरकार ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को दी जबरदस्त रफ्तार

Editor
3 Min Read

लखनऊ. 
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में गो संरक्षण को केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि इसे ग्रामीण अर्थव्यवस्था, महिला सशक्तीकरण और प्राकृतिक खेती से जोड़कर विकास का मजबूत मॉडल बनाया गया है। उत्तर प्रदेश में वर्तमान में 7700 से अधिक गोशालाएं संचालित हैं, जहां 12 लाख से ज्यादा निराश्रित गोवंश संरक्षित किए जा रहे हैं। योगी सरकार की यह पहल गांवों में रोजगार, आय और आत्मनिर्भरता का नया आधार बनकर उभर रही है।

योगी सरकार अब तक 1.62 लाख से अधिक गाय किसानों और पशुपालकों को सौंप चुकी है। इन पशुओं के पालन-पोषण के लिए लाभार्थियों को 1500 रुपये प्रतिमाह की सहायता राशि भी प्रदान की जा रही है। इससे किसानों को दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ जैविक खेती में भी लाभ मिल रहा है। 

महिला स्वयं सहायता समूहों को मिला आत्मनिर्भरता का नया रास्ता
उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने बताया कि प्रदेश के 38 जिलों में महिला स्वयं सहायता समूह गो आधारित उत्पादों के निर्माण और विपणन से जुड़ चुके हैं। इससे 50 हजार से अधिक महिलाओं को प्रत्यक्ष रोजगार मिला है। गोबर और पंचगव्य आधारित उत्पादों के कारोबार में करीब 30 प्रतिशत तक की वृद्धि दर्ज की गई है, जिससे ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है।

इसके अलावा उन्नाव में महिलाएं गाय के गोबर से प्राकृतिक डिस्टेंपर पेंट तैयार कर रहीं हैं। यह पेंट कम लागत वाला होने के साथ एंटीबैक्टीरियल, एंटी फंगल और पूरी तरह गंध रहित है। पर्यावरण के अनुकूल होने के कारण इसकी मांग लगातार बढ़ रही है। इससे स्थानीय स्तर पर छोटे उद्योगों को भी बढ़ावा मिल रहा है।

जैविक खाद और पंचगव्य उत्पाद बने ग्रामीण रोजगार का नया आधार
उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने बताया कि योगी सरकार की नीतियों में गोबर को अपशिष्ट नहीं बल्कि आय और रोजगार के संसाधन के रूप में विकसित किया गया है। प्रदेश में गोबर से जैविक खाद, धूपबत्ती, साबुन, पंचगव्य उत्पाद और बायोगैस तैयार की जा रही है।

जैविक खाद का बाजार मूल्य 4 हजार से 6 हजार रुपये प्रति टन तक पहुंच चुका है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिल रही है। वहीं प्राकृतिक खेती से 8 लाख से ज्यादा किसान जुड़ चुके हैं। जिससे रासायनिक खाद की लागत में 30 से 40 प्रतिशत तक कमी आई है।

TAGGED:
Share This Article
Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

YouTube Reporters Support Directors Live