दंतेवाड़ा में रनिंग वाटर स्टैंड निर्माण घोटाला! लाखों के गबन का आरोप

Editor
2 Min Read
दंतेवाड़ा में रनिंग वाटर स्टैंड निर्माण घोटाला! लाखों के गबन का आरोप
WhatsApp Share on WhatsApp
add_action('wp_footer', 'jazzbaat_new_version_modal'); function jazzbaat_new_version_modal() { ?>
SW24news • Beta

दंतेवाड़ा.

बस्तर में एक बार फिर संसाधनों के दोहन को लेकर सवाल उठने लगे हैं. सरकार जहां नक्सल मुक्त बस्तर और औद्योगिक विकास की बात कर रही है, वहीं बस्तर का लौह अयस्क और पानी दूसरे राज्यों के उद्योगों की ताकत बन रहा है. किरंदुल की खदानों से रोजाना हजारों टन लौह अयस्क स्लरी पाइपलाइन के जरिए बाहर भेजा जा रहा है.

साथ ही शबरी नदी और मदाड़ी नाले का पानी भी बड़े औद्योगिक प्रोजेक्ट में उपयोग हो रहा है. बताया जा रहा है कि आंध्रप्रदेश में लगने वाला विशाल स्टील प्लांट देश के सबसे बड़े संयंत्रों में शामिल होगा. इधर बस्तर के युवाओं का सवाल है कि जब संसाधन यहां के हैं, तो रोजगार और उद्योग बाहर क्यों जा रहे हैं. स्थानीय लोगों का आरोप है कि इससे क्षेत्र के हजारों युवाओं की रोजगार संभावनाएं प्रभावित हुई हैं. ग्रामीणों ने यह भी दावा किया कि खनन और अपशिष्ट से खेती और नदी-नाले प्रभावित हो रहे हैं. लोगों का कहना है कि बस्तर केवल कच्चा माल देने वाला इलाका बनकर रह गया है.

रॉयल्टी और औद्योगिक लाभ का बड़ा हिस्सा दूसरे राज्यों को मिलने का भी मुद्दा उठ रहा है. अब मांग उठ रही है कि दक्षिण बस्तर में ही बड़ा इस्पात संयंत्र स्थापित कर स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता दी जाए. स्थानीय संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि बस्तर के हितों की अनदेखी हुई तो आंदोलन तेज किया जाएगा.

Share This Article
Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *